मंगलवार, 14 अगस्त 2018

वतन के जाँ-निसार

कोई मज़हब नहीं होता शहीदों की मज़ारों का,
कोई मज़हब नहीं होता वतन के जाँ-निसारों का,

मज़हब को पूछकर गोली सरहद पे नहीं चलती,
कोई मज़हब नहीं होता सरहद के पहरेदारों का !

||| फ़राज़ |||

मज़हब= Religion
शहीद= Martyr
मज़ार= Shrine, Tomb
वतन= Country, Abode
जाँ-निसार= Devoted, Fervent, One Who Sacrifices His Life For Others.
सरहद= Border
पहरेदार= Sentinel, Watchman.

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

किरदार !!!

चेहरों की इतनी फ़िक्र क्यूँ है,
रंगों की इतनी क़द्र क्यूँ है ?

हुस्न अस्ल किरदार का है,
गोरा काले से बेहतर क्यूँ है ?

हसरत को कैसे समझाऊँ,
इतनी छोटी चादर क्यूँ है ?

नीयत का दोष ही सारा है,
तो फ़िर बदनाम नज़र क्यूँ है ?

सब एक ख़ुदा के बच्चे हैं,
तो फ़िर मस्जिद-मंदिर क्यूँ हैं ?

वो भी तो बस एक इंसाँ है,
उसके सजदे में सर क्यूँ हैं ?

सब मिलके साथ नहीं रहते,
इतने छोटे अब घर क्यूँ हैं ?

जिनकी जेबें ही ख़ाली हैं,
उनको रहज़न से डर क्यूँ है ?

ये फ़िक्र बहुत है दुनिया को,
'फ़राज़इतना बे-फ़िक्र क्यूँ है !

||| फ़राज़ |||

फ़िक्र= Concern, Anxiety
क़द्र= Dignity, Honor, Merit, Value
हुस्न= Beauty, Elegance, Comeliness
अस्ल= Real, Original
किरदार= Character
बेहतर= Better
हसरत= Desire
नीयत= Intention, Purpose, Object
दोष= Fault
बदनाम= Defame, Malign
इंसाँ= Human
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
ख़ाली= Empty
रहज़न= A Robber
बे-फ़िक्र= Careless

बे-फ़िक्र= Careless


गुरुवार, 9 अगस्त 2018

इतना टूटा नहीं हूँ कि बिखर जाऊँगा,
ज़रा वक़्त दे मुझेमैं निखर जाऊँगा !

माना कि बहुत दूर मैं निकल आया हूँ,
यक़ीन है एक दिन लौट के घर जाऊँगा !

ये तो डर कि एक दिन था बिछड़ना होगा,
क्या ख़बर थी कि तेरे दिल से उतर जाऊँगा !

मयकदे में तो लोग ख़ुद को भूल जाते हैं,
तुझे भुला न सका तो किधर जाऊँगा !

जब बुलाओगे तो दौड़ा चला आऊँगा,
मैं कोई वक़्त नहीं हूँ जो गुज़र जाऊँगा !

सुना है की वहां रहमतें बरसती हैं,
जाने कब मैं मुस्तफ़ा के शहर जाऊँगा !

एक उम्र से 'फ़राज़तूफ़ाँ में पला है,
हवाएँ जब ख़िलाफ़ होंगीसंवर जाऊँगा !

||| फ़राज़ |||

ख़बर= Knowledge, Information
मयकदे= Bar, Tavern
रहमतें= Divine Mercy, Blessing
मुस्तफ़ा= One Of The Names Of The Prophet Muhammad (S.A.W)
तूफ़ाँ= A Storm Of Wind And Rain, Tempest, Deluge, Flood
ख़िलाफ़= Against

सोमवार, 6 अगस्त 2018

ज़िन्दगी !!!

तू जीता क्यूँ गुज़रे कल में है,
ज़िन्दगी तो बस इस पल में है !

नज़र बा-अदब ये सोच के झुक जाती है,
कि उसकी इज़्ज़त भी छुपी आँचल में है !

दो किरदार किस तरह वो जी लेता है,
ज़बां पे यारी, छुरी उसकी बग़ल में है !

चलो मिलें हम फ़िर से अजनबी बन कर,
अधूरेपन सा लुत्फ़ कहाँ मुकम्मल में है !

नशा भी किरदार के मुताबिक़ होता है,
सच की एक दवा भी इस बोतल में है !

तन्हाई भी मुकम्मल मयस्सर नहीं होती,
जिस्म तो एक जिस्मों के जंगल में है !

यूँ तो हर मौत का लम्हा मुक़र्रर है,
जी ले कि ज़िन्दगी तो हर एक पल में है

यक़ीन कर कि ना-मुमकिन कुछ भी नहीं,
'फ़राज़मुश्किल तो महज़ पहल में है !

||| फ़राज़ |||

बा-अदब= Respectfully, With Due Respect.
इज़्ज़त= Respect, Esteem, Honor, Glory
किरदार= Character
ज़बां= Tongue, Speech
बग़ल= Armpit, Side
लुत्फ़= Pleasure, Enjoyment
मुकम्मल= Complete, Perfect
मुताबिक़= Like, Suitable, In Accordance
तन्हाई= Loneliness, Solitude
मयस्सर= Available
मुक़र्रर= Fixed
यक़ीन= Certainty, Truth, Confidence, Trust 
ना-मुमकिन= Impossible
मुश्किल= Difficulty
महज़= Only, Merely
पहल= Beginning, First Initiative.

गुरुवार, 2 अगस्त 2018

बुरा है !

इस क़दर ये ज़माना बुरा है,
कि बे-वजह मुस्कुराना बुरा है !

बात घर की निकल जाये बाहर,
इतना भी दोस्ताना बुरा है !

झाँक कर के गरेबाँ भी देखो,
सबपे ऊँगली उठाना बुरा है !

आईना ज़रा ख़ुद भी देखो,
कौन कहता ज़माना बुरा है !

नफ़रतें हों तो दिल में ही रखिये,
प्यार है तो छुपाना बुरा है !

दिल्लगी को चलो भूल जाओ,
इश्क़ को तो भुलाना बुरा है !

इम्तिहाँ हो जो इंसानियत का,
उसमें अपना-बेगाना बुरा है !

हो जाये गुनाह कोई सरज़द,
ऐसा रुपया कमाना बुरा है !

हो छुपाये किसीकी जो इज्ज़त,
ऐसा पर्दा हटाना बुरा है !

मैं करता नहीं जाँ की परवाह,
दुश्मनों का निशाना बुरा है !

बात कुछ तो पते की है कहता
'फ़राज़' को मैंने माना बुरा है !

||| फ़राज़ |||

क़दर= Amount, Degree
ज़माना= Time, World, Era
बे-वजह= Causeless, Without cause
दोस्ताना= Friendship
गरेबाँ= Collar
दिल्लगी= Flirt
इम्तिहाँ= Exam, Test
इंसानियत= Humanity
अपना-बेगाना= Nepotism, Favouritism
सरज़द= Be committed.
जाँ= Life.

मंगलवार, 31 जुलाई 2018

ख़ुश-ख़बर !

नया मौसम हो जातू ख़ुश-ख़बर हो जा,
बारिश की तरह फ़सलों को मयस्सर हो जा !

जलना है तो यूँ जल कि उजाला हो,
हर एक अँधेरे में तू मुनव्वर हो जा !

तेरी ख़बर भी पूछेंगे ये ख़बरवाले,
बस एक बार तू ख़ुद से बा-ख़बर हो जा !

कोई नक़्श-ए-क़दम जहाँ तक पहुँचे न हों,
ऐसी मंज़िल का तू रहबर हो जा !

मेरी क़ौम फ़िर से सर-बुलंद हो जायेगी,
 मुसलमां तू फ़िर से मोतबर हो जा !

ये दुनिया इतनी बुरी भी तो नहीं है
ख़ुशी ढूँढनी है तो तू ख़ुश-नज़र हो जा !

सुकूँ बिकता नही है 'फ़राज़बाज़ारों में,
मस्त रहना है तो तू क़लन्दर हो जा !

||| फ़राज़ |||

ख़ुश-ख़बर= Good News
फ़सल= Crops
मयस्सर= Available
मुनव्वर= Illuminated, 
ख़बर= News
ख़बर-वाले= News Media
बा-ख़बर= Aware, Informed
नक़्श-ए-क़दम= Footsteps, Footprints
रहबर= Guide
क़ौम= Tribe, Race, Community
सर-बुलंद= Eminent, Glorious.
मुसलमां= The Muslim
मोतबर= Trust-Worthy, Reliable
ख़ुश-नज़र= Positive-Sighted
सुकूँ= Peace
क़लन्दर= Ascetic, One Who Has Abandoned Wealth And Worldly Pleasures


शनिवार, 28 जुलाई 2018

कवायद !

हर क़दम एक नई दुश्वारी है,
ज़िन्दगी तो फ़िर भी जारी है !

मत सोच नतीजा क्या होगा,
वो कर जो तेरी ज़िम्मेदारी है !

इंसान के इंसान बनने की,
क़वाइद अब भी जारी है !

इसका हिसाब चुकाना होगा,
ये ज़िन्दगी एक उधारी है !

बहुत कमाई है ज़िन्दगी तूने,
बता मौत की क्या तैयारी है?

फ़िर से हैं चुनावी तक़रीरें,
फ़िर भूख मज़हब से हारी है !

जहाँ हम कहें वहां करो सजदा,
हो रहा ये ऐलान सरकारी है !

जो दिल में वो ज़बां पर है,
आदत कुछ ऐसी हमारी है !

कुछ तमाशा तो तू भी कर,
'फ़राज़' ये दौर ही इश्तिहारी है !

||| फ़राज़ |||

क़दम= Step
दुश्वारी= Difficulty
जारी= Proceeding, Continue
नतीजा= Result, Outcome
ज़िम्मेदारी= Responsibility
क़वाइद = Exercise, Drill
चुनावी= Electoral
तक़रीरें= Speeches, Recitals, Orations
मज़हब= Religion
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
ऐलान= Announcement, Proclamation, Notification
सरकारी= Governmental, Official
ज़बां= Tongue, Speech
दौर= Time, World
इश्तिहारी= Related To Publicity

मंगलवार, 24 जुलाई 2018

ख़ता !

कुछ ख़ताएँ न की तो फ़िर मज़ा क्या है,
फ़रिश्ता होने में इतना भी नफ़ा क्या है !

मामला दिल का है तो फ़र्क़ पड़ता क्या है,
कि सही-ग़लत और भला-बुरा क्या है !

तेरी बाहों से जो मुझे रिहा कर दे,
ऐसी आज़ादी में भला नफ़ा क्या है !

तेरी जफ़ा को भी सलीक़े से बयां करता हूँ,
वफ़ा-दारी की इससे बेहतर सज़ा क्या है !

याद कर करके तुझको मैं ये सोचता हूँ,
कि तुझे भूल जाने का तरीका क्या है !

तेरी याद को मेरे दिल से भुला न सके,
उस मयकदे में 'फ़राज़' नशा क्या है !

ख़ता= Fault, Mistake
फ़रिश्ता= Angel
नफ़ा= Profit
मामला= Matter
फ़र्क़= Difference
रिहा= Release
जफ़ा= Injustice, The Tyranny Of Beloved
सलीक़ा= Good Manners, Discreet Of Good Disposition
बयां= Statement, Declaration, Description, Assertion
वफ़ा-दारी= Constancy, Fidelity
बेहतर= Better
सज़ा= Punishment
मयकदा= Bar, Tavern.

रविवार, 22 जुलाई 2018

मुंडेर !

चलो फ़िर से उसे छत पे बुलाया जाए,
चाँद फ़िर से मुंडेर पे लाया जाए !

सुना है उसकी मुस्कान बड़ी महँगी है,

चलो ख़ुद को दांव पे लगाया जाए !

चलो फ़िर से बहाने से उनको देखें,

चलो फ़िर से  पतंगों को उड़ाया जाए !

वो कश्मकश कि कौन पहले बात करे,

बात करने का कोई बहाना बनाया जाए !

शायद मेरी आहट पे चला आये दौड़ के,

चलो दीवार पे कपड़ों को सुखाया जाए !

चलो फिर से नज़र से कोई बात करें,

हाल-ए-दिल इशारों में जताया जाए !

चलो फ़िर से घर पे कोई महफ़िल हो,

सबके बहाने से उनको भी बुलाया जाए !

चलो फिर से ख़ुद को एक अज़ीयत दें,

चलो फ़िर से दिल उनसे लगाया जाए !

चलो चाँद में तकें फ़िर से उनके चेहरे को,

चलो फ़िर रात को जाग के बिताया जाए !

कोई बदनामी न होगी अगर नाम न आये,

बिना नाम लिए 'फ़राज़' उनपे कुछ सुनाया जाए !

||| फ़राज़ |||


कश्मकश= Struggle, Wrangle, Tussle,
हाल-ए-दिल= Condition Of The Heart
महफ़िल= Party, Gathering
अज़ीयत= Trouble, Suffering, Distress
बदनामी= Defame, Ignominy