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मंगलवार, 31 जुलाई 2018

ख़ुश-ख़बर !

नया मौसम हो जातू ख़ुश-ख़बर हो जा,
बारिश की तरह फ़सलों को मयस्सर हो जा !

जलना है तो यूँ जल कि उजाला हो,
हर एक अँधेरे में तू मुनव्वर हो जा !

तेरी ख़बर भी पूछेंगे ये ख़बरवाले,
बस एक बार तू ख़ुद से बा-ख़बर हो जा !

कोई नक़्श-ए-क़दम जहाँ तक पहुँचे न हों,
ऐसी मंज़िल का तू रहबर हो जा !

मेरी क़ौम फ़िर से सर-बुलंद हो जायेगी,
 मुसलमां तू फ़िर से मोतबर हो जा !

ये दुनिया इतनी बुरी भी तो नहीं है
ख़ुशी ढूँढनी है तो तू ख़ुश-नज़र हो जा !

सुकूँ बिकता नही है 'फ़राज़बाज़ारों में,
मस्त रहना है तो तू क़लन्दर हो जा !

||| फ़राज़ |||

ख़ुश-ख़बर= Good News
फ़सल= Crops
मयस्सर= Available
मुनव्वर= Illuminated, 
ख़बर= News
ख़बर-वाले= News Media
बा-ख़बर= Aware, Informed
नक़्श-ए-क़दम= Footsteps, Footprints
रहबर= Guide
क़ौम= Tribe, Race, Community
सर-बुलंद= Eminent, Glorious.
मुसलमां= The Muslim
मोतबर= Trust-Worthy, Reliable
ख़ुश-नज़र= Positive-Sighted
सुकूँ= Peace
क़लन्दर= Ascetic, One Who Has Abandoned Wealth And Worldly Pleasures