गुरुवार, 7 जून 2018

उम्र-ए-दराज़ !!!

जिस्मों की तो आदत है, मिल करके बिछड़ जाना,
तुम मिलना तो ऐसे मिलना कि रूह में उतर जाना !

मुड़कर के हमने देखा, जब अपनी ज़िन्दगी को,
उम्र--दराज़ बस एक लम्हे का गुज़र जाना !

बेफ़िक्र किस क़दर था वो इश्क़ का ज़माना,
कर के तेरा तसव्वुर आठों पहर जाना !

मुझसे तेरी नज़र का पहले-पहल वो मिलना,
सदियों की गर्दिशों का लम्हें में ठहर जाना !

वो जाते-जाते तेरा मुड़कर के मुस्कुराना,
एक रूठती सी किस्मत का फ़िर से संवर जाना !

सब झूठ तो नहीं है, एक बात वो भी सच थी,
ज़िक्र--फ़िराक़ से तेरी आँखों का वो भर जाना !

देखा जो परिंदों को, तो याद आया हमको,
वो शामों का ढलना, वो लौट के घर जाना !

इस बार तो इतना भी तक़दीर में नहीं है,
हो ईद का बहाना और अपने शहर जाना !

||| फ़राज़ |||

जिस्म= Body, Material, Substance
रूह= Soul, Spirit, The Vital Principle
उम्र--दराज़= Long Life
लम्हा= Moment
बेफ़िक्र= Carefree
क़दर= Amount, Appreciation, 
ज़माना= Era
तसव्वुर= Imagination, Thought
पहर= Period Of Time, An 8th Hour Of A Day.
पहले-पहल= Initially, The First Time.
सदियों= Centuries, Centenaries
गर्दिशों= Revolution, Circulation, Misfortune
ज़िक्र--फ़िराक़= Mention/Talk of parting
परिंदों= Birds
तक़दीर= Fate, Destiny.






सोमवार, 4 जून 2018

अश्क़ !!!

दर्द-ए-दिल ग़ज़ल में बयाँ करके रो लिए,
तन्हाई को फ़िर दास्ताँ सुना करके रो लिए !

किसको सुनाएँ दर्द कि सब ग़ैर हो गए हैं,
तकलीफ़ सारी ख़ुद को सुना करके रो लिए !

तेरा नाम को न सुन लें कहीं ये ज़माने वाले,
सीने में हिचकियों को दबा करके रो लिए !

शिकवा तेरी जफ़ा का, करते भी हम तो किस से,
इल्ज़ाम सारे ख़ुद पे लगा करके रो लिए !

की भूलने की कोशिश, और याद करके रोये,
हर बार ख़ुद को ही आज़मा करके रो लिए !

मज़मून जिनका दिल सेमिटता नहीं मिटाए,
तेरे उन्ही ख़तों को जला करके रो लिए !

यूँ भी हुआ कि एक दिन सौदाई हो गए,
ख़ुद को ही ख़ुद हँसाया और हंसा करके रो लिए !

रोये हम इस क़दर कि आँसू भी न बचे जब,
अपने लहू को अश्क़ बना करके रो लिए !

जुर्म-ए-वफ़ा की हमने ख़ुद को सज़ा ये दी है,
ख़ुद को ही ख़ुद का मुजरिम बता करके रो लिए !

तमाशा मेरी वफ़ा का न देख ले ये दुनिया,
तकिये में अपने मुँह को छुपा करके रो लिए !

जागे जो नींद से तो जाना की ख़्वाब था वो,
पहलू में हम तुझे न पा करके रो लिए !

रोता था मैं तो मुझपे हँसते थे ये उजाले,
'फ़राज़हम चराग़ों को बुझा कर के रो लिए !

||| फ़राज़ |||

दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Grief, Sorrow, Anguish
बयाँ= Description, Narrative, Statement
तन्हाई= Loneliness, Privacy, Solitude
दास्ताँ= Story, Fable, Tale
ग़ैर= Stranger, Unacquainted
तकलीफ़= Pain, Affliction
शिकवा= Complaint, Reproach
जफ़ा = Oppression, Injust
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
आज़मा= Try, Test
मज़मून= Article, Subject Matter.
सौदाई= Insane, Mad
क़दर= Amount
अश्क़= Tears
जुर्म-ए-वफ़ा= Guilty/Crime Of Faithfulness/Loyalty
बारहा= Many Times
मुजरिम= Criminal
तमाशाShow, Exhibition,
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness
पहलू= Side, Flank
ख़्वाब= Dream
चराग़= An Oil Lamp.

बुधवार, 30 मई 2018

बारिश !!!

ख़्वाहिशों ने बादलों से,
चुपके से साज़िश की थी !
एक शाम तुम भी साथ थी,
और बारिश भी थी !

सर्द हवाओं ने,
एहसासों को हवा दी थी !
बारिश की बूंदों में,
जज़्बातों की आंच सी थी !

जब क़ुर्ब हासिल हो जाये,
ख़ामोश दो निगाहों से !
मिलते हैं ऐसे मौसम,
'फ़राज़' बड़ी दुआओं से !

||| फ़राज़ |||

ख़्वाहिश= Wish, Desire
साज़िश= Conspiracy
सर्द= Cold
एहसास= Feeling, Perception
जज़्बात= Emotions, Feelings
आंच= Flame, Warmth,
क़ुर्ब= Vicinity, Nearness,
हासिल= Gain
ख़ामोश= Silent



शनिवार, 26 मई 2018

तो हमको चैन पड़े !!!

वो फ़िर बुलाएँ तो हमको चैन पड़े,
पर हम न जाएँ तो हमको चैन पड़े !

यूँ तो रूठ कर सुकून ज़्यादा है,
पर वो मनाएँ तो हमको चैन पड़े !

उनके चेहरे पे नदामत हो और,
हम मुस्कुराएँ तो हमको चैन पड़े !

मेरे सवालों पे पशेमां हो के,
वो आँसू बहाएं तो हमें चैन पड़े !

वो रोएँ हमसे लिपट कर के और,
हमको भी रुलाएँ तो हमको चैन पड़े !

ज़माना बेवफ़ा कहता है उनको,
वो ख़ुद बताएँ तो हमको चैन पड़े !

उनकी वफ़ा को भी बेवफ़ाई से,
कोई आज़माये तो हमको चैन पड़े !

उनसे भी कोई वादे करके,
न निभाये तो हमें चैन पड़े !

जिसे वो चाहते हैं वही उनका,
दिल दुखाए तो हमको चैन पड़े !

काश यूँ हो कि कोई उनको भी,
छोड़ जाए तो हमको चैन पड़े !

हमसे नहीं तो हमारी ग़ज़ल से ही,
वो दिल लगाएँ तो हमको चैन पड़े !

उनकी ही तरह हम भी उनको,
भूल जाएँ तो हमको चैन पड़े !

शायद तमन्ना अब भी यही दिल में है,
कि वो लौट आएँ तो हमको चैन पड़े !

'फ़राज़' ये जीतने वाले हमसे,
हार जाएँ तो हमको चैन पड़े !

||| फ़राज़ |||


चैन= Comfort, Ease, Happiness, Peace
सुकून= Peace, Rest, Tranquility
नदामत= Regret, Repentance, Shame
पशेमां= Embarrassed/ Penitent
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous
वफ़ा= Fidelity, Faithful
शायद= Perhaps
तमन्ना= Wish, Desire, Inclination, Request

सोमवार, 21 मई 2018

तसव्वुर-ए-ग़ज़ल !!!

तू न आये, मुझपे तेरा इल्ज़ाम तो आये,
मेरी दीवानगी मेरे भी कुछ काम तो आये !

तू दुआ न सही, बद-दुआ ही दे दे मुझे,
कि तेरे लबों पर मेरा नाम तो आये !

मुझे भी दीवाना कहें, लोग पत्थर मारें,
तेरी आशिक़ी में मेरा वो मक़ाम तो आये !

अभी होश में हूँ मैं, कुछ समझ नहीं आता,
याद सब आ जाएगा, पहले जाम तो आये !

दवा देना है तो दे वरना ज़हर ही दे दे,
मरीज़-ए-इश्क़ को अब आराम तो आये !

कई राज़ मुन्तज़िर हैं कहे जाने को,
जवाब सारे तैयार हैं मगर सलाम तो आये !

तमाशा इश्क़ का हो तो सारी दुनिया देखे,
मेरी तसव्वुर-ए-ग़ज़ल सर-ए-आम तो आये !

मेरा नाम ले के तुझको कोई बदनाम कर दे,
'फ़राज़' के नाम के साथ तेरा नाम तो आये !

||| फ़राज़ |||

इल्ज़ाम= Blame, Accusation
दीवानगी= Madness, Lunacy, Insanity
बद-दुआ= Curse
लब= Lips
आशिक़ी= Love, State Of Being In Love Courtship
मक़ाम= Place, Position
होश= Sense
जाम= Glass Of Wine
मरीज़-ए-इश्क़= Sick Of Love
राज़= Secret
मुन्तज़िर= Expectant, One Who Waits
सलाम= Salutation
तसव्वुर-ए-ग़ज़ल= Imagination/ Contemplation Of An Ode/ Gazal
सर-ए-आम= In Public
बदनाम= Defame

शनिवार, 19 मई 2018

फ़राज़ |||

ख़ुद से जीत जाता हूँ,
जब ख़ुद से जंग करता हूँ !

आसमान छू लेता हूँ,
जब मन पतंग करता हूँ !

रंग नया बन जाता हूँ,

जब ख़ुद को बेरंग करता हूँ !

बे-ज़रूरत सा हो जाता हूँ,
जब मन मलंग करता हूँ !

लिख के अपनी ही हक़ीक़त,
ख़ुद को ही दंग करता हूँ !

एक-तरफ़ा इश्क़ में 'फ़राज़'

ख़ुद को ही तंग करता हूँ !

||| फ़राज़ |||


जंग= Battle, War
बेरंग= Colorless
बे-ज़रूरत= Without The Need
मलंग= Nomad, Dervish
हक़ीक़त= Reality
दंग= Wonder
एक-तरफ़ा= One-Sided
तंग= Distress, Trouble

मंगलवार, 15 मई 2018

लोग !!!

पानी में अक्स देखते हैंलहरों को ख़ता देते हैं,
ग़ैरों की ग़ल्तियों की अपनों को सज़ा देते हैं !

इंसान को इंसान तो  समझते नहीं लेकिन,
पत्थर को भी ख़ुदा तो यही लोग बना देते हैं !

मिलते थे बे-सबब ही जोमसरूफ़ हैं इतने,
मिलते हैं तो मिलने का भी एहसान जता देते हैं !

तू ग़म न कर कि तुझपे ये हालात आ गए,
जीने का सलीक़ा भी तो हालात सिखा देते हैं !

ये लोग तमाशाई हैंइनकी न सुनो तुम,
आग लगा कर के यही लोग मज़ा लेते हैं !

आप भी बे-सबब ही किसी का दर्द बांटिये,
इंसान तो आज भी दिल से दुआ देते हैं !

शम्मा को तो जलना हैपतंगे से उसे क्या,
अपनी ही ज़िद में पतंगे  ख़ुद को जला लेते हैं !

इन सबके भी दिल में तो आरज़ू-ए-यार है,
क्यूँ इश्क़ करने की यही लोग सज़ा देते हैं?

'
फ़राज़' भला उन लोगों का अक़ीदा क्या होगा,
जो ज़हर सस्ता और महँगी दवा देते हैं !

||| फ़राज़ |||

अक्स= Reflection, Reverse, Image.
ख़ता= Mistake, Fault.
ग़ैर= Stranger
ग़ल्ती= Fault, Error, Mistake
सज़ा= Punishment
बे-सबब= Without Cause Or Reason
मसरूफ़= Busy
एहसान= Favor
ग़म= Sorrow, Grief.
हालात= Circumstances.
सलीक़ा= Good Manners, Discreet Of Good Disposition
तमाशाई= Bystander, Onlooker,
शम्मा= Candle
ज़िद= Obstinacy, Pigheadedness
पतंगे= Moth
आरज़ू-ए-यार= Desire, Wish,  Longing Of Beloved/Lover
अक़ीदा= Fundamental Doctrine Of Belief, Tenet