बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

!!! रंग-ए-हिना !!!

रंग-ए-हिना तो वही रहता है लेकिन,
नक्श-ए-हिना में क्यूँ नाम बदल जाते हैं !

पहचानी सी लिखावटअजनबी सा मज़मून,
कि हाल न पूछिये जब पैग़ाम बदल जाते हैं !

 ग़म-ए-यार, कभी तू भी बदल के मिल,
फ़िलहाल तो बस साकी-ओ-जाम बदल जाते हैं !

मैं कब तलक बेगुनाही के सबूत देता रहूँ,
हर दफ़ा मुझपर इल्ज़ाम बदल जाते हैं !

राज़-ए-हस्ती उनको बताया तो ये सीखा हमने,
राज़ खुलते हैं तो आदाब-ए-एहतराम बदल जाते हैं !

तू नुमाईश न कर अपने दिल के टुकड़ों की,
टूटी-फूटी चीज़ों के तो दाम बदल जाते हैं !

बेशक दुश्मनों से भी सलाम-दुआ रखनी चाहिए,
जब हुकूमत बदलती है तो निज़ाम बदल जाते हैं !

मंज़िल-ए-मक़्सूद नहीं मिलती इश्क़वालों को,
कभी मीरा बदल जाती है, कभी श्याम बदल जाते हैं !

मैंने भी कभी किसीको ख़ुदा माना था 'फ़राज़',
इश्क़ में तो ख़ुदाओं के भी मक़ाम बदल जाते हैं !

||| फ़राज़ |||
रंग-ए-हिना= Color/Complexion Of Henna.
नक्श-ए-हिना= Design/Impression Of Henna
अजनबी= Stranger, Unknown
मज़मून= Composition, Subject Matter.
हाल= Condition
पैग़ाम= Message
ग़म-ए-यार= Sorrow Of Beloved
फ़िलहाल= As Of Now, At Present
साकी-ओ-जाम= One Who Serves Wine And Glass Of Wine 
बेगुनाही= Innocence, Without Sin.
सबूत= Evidence.
दफ़ा= Time
साबित= Prove
इल्ज़ाम= Blame Accusation.
राज़-ए-दिल= Secret Of The Heart
आदाब-ए-एहतराम= Manner/Etiquette Of Respect.
नुमाईश= Show, Display, Exhibition.
टूटी-फूटी= Broken, Shattered
चीज़= Thing
बेशक= Doubtless
सलाम-दुआ= Hi-Hello, Formality.
हुकूमत= Government, Dominion
निज़ाम= System, Order
मंज़िल-ए-मक़्सूद= Destination, The Goal, Aim
इश्क़वाले= Lovers, Love-Birds
ख़ुदा= God
इश्क़= Love

मक़ाम= Position, Place

सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

!!! फ़राज़-किरदारी !!!

बोहतान मुझपर कभी छोटा नहीं लगता,
अपनी भी शहर में मेयारी तो अभी बाक़ी है !

रिश्वत ही देनी है तो तू फ़िरदौस ले के आ,

मेरी भी फ़राज़-किरदारी तो अभी बाक़ी है !

तू तो क़र्ज़दार है मेरा, तू मुझे क्या देगा,
तेरे माज़ी पर मेरी उधारी तो अभी तो बाक़ी है !

महज़ क़ानून बना देने से जरायम नहीं रुकने वाले,
मेरे मुल्क में भूख और बेरोज़गारी तो अभी बाक़ी है !

मुकम्मल रश्क़ ज़ाया कर तू मेरी ग़ज़लों पर,
मेरे कलम की नग़मानिगारी तो अभी बाक़ी है !

पापा अक्सर ये सोचकर नए कपड़े नहीं लाते,
कि मेरे बच्चों की ख़रीदारी तो अभी बाक़ी है !

तुम अभी न दो मुझे उस्ताद का दर्जा,
मेरे कलाम की शाहकारी तो अभी बाक़ी है !

हाथ फैलाएगा तो सिर्फ़ अल्लाह के सामने,
'फ़राज़' में इतनी ख़ुद्दारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बोहतान= False accusation, Calumny
शहर= City
मेयारी= Qualitative, Standard
रिश्वत= Bribe
फ़िरदौस= The highest layer of heaven/Paradise.
फ़राज़-किरदारी= Elevated character.
क़र्ज़दार= Indebted, Debtor
माज़ी= Past
उधारी= Debt, Loan
बाक़ी= Remaining
महज़= Merely, Only.
क़ानून= Law, Stature, Rule. 
जरायम= Crimes, Sins.
मुल्क= Country
बेरोज़गारी= Unemployment.
मुकम्मल= Complete
रश्क़= Jealousy, Envy.
ज़ाया= Waste
कलम= Pen
नग़मानिगारी= Song/Lyrics writing.
ख़रीदारी= Shopping
उस्ताद=  Teacher, Mentor
दर्जा= Class, Rank, Grade.
कलाम= Word, Speech
शाहकारी= Masterpiece.
ख़ुद्दारी= Self-respect

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

तस्सव्वुर !!!

कोई अमल  काफ़िराना कर बैठूं,
अजब सी मयकशी है उन निगाहों में !

झपक दे वो पलकें तो वक़्त रुक जाये,
सारा आलम सिमट आये मेरी पनाहों में !

तेरे तस्सव्वुर में मेरे सजदे क़ज़ा होते हैं,
मुब्तला करता है तू मुझको गुनाहों में !

तेरा एहसास जैसे कोई नेकी का सिला,
तेरा दीदार जैसे असर हो मेरी दुआओं में !

तेरी तलाश, तू ही सफ़रमंज़िल तू ही,
साथ चलता है तेरा साया मेरी राहों में !

इश्क़ इबादत हो या न हो 'फ़राज़',
सवाब रखा है ख़ुदा ने वफ़ाओं में !

||| फ़राज़ |||

अमल= Act
काफ़िराना= Infidelity, Idolatry
अजब= Strange
मयकशी= Booze
निगाह= Eye
आलम= Universe
पनाह= Protection, Shelter, Shade
तस्सव्वुर= Imagination
सजदा= bowing in prayer so as to touch the ground with the forehead
क़ज़ा= Lapse, 
मुब्तला= Afflicted, Distressed.
गुनाह= Sin, Crime.
एहसास= Feeling
नेकी= Goodness, Piety
सिला= Reward
दीदार= Appearance, Sight
दुआ= Prayer, Wish
तलाश= Search
सफ़र= Journey
मंज़िल= Destination
साया= Shadow, Shade
इश्क़= Love
इबादत= Prayer, Adoration
सवाब= Reward of good deeds.
ख़ुदा= God.

वफ़ा= Fidelity, Fulfilling of promises.

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

!!! रंग !!!

अब तो हर मौसम में
ज़रा और फीका पड़ जाता है,
रंग बालों का,
रंग ख़यालों का
और,
रंग मलालों का !

उस दीवार-घड़ी ने
बदलते देखे हैं 
कैलेण्डर,
न जाने कितने सालों के  !
सोचता हूँ कि वक़्त न सही,
इस बार
घड़ी ही बदल दूँ !

उस खिड़की पर भी
बदले जा चुके हैं
कई पुराने परदे,
लेकिन
तुम्हारे होने का एहसास
बाक़ी है
उस तकिये में,
और मुझमें !

मैं ख़ुद को तसल्ली दूँ,
या ख़ुद से ही मैं जंग करूँ !
ऐ-रंग-ए-ग़म-ए-यार,
बता क्या मैं तेरा रंग करूँ !

||| फ़राज़ |||

मौसम= season
ज़रा= A bit
फीका= Insipid, Faded, Languid
ख़यालों= Thoughts
मलालों= Regrets.
सालों= Years.
वक़्त= Time
परदे= Veil
एहसास= Feeling
तकिया= Pillow
ख़ुद= Self
तसल्ली= Solace, Consolation
जंग= Battle, War
रंग-ए-ग़म-ए-यार= Color of beloved's sorrow.


शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

अभी बाक़ी है !!!

उसके नाम की पर्देदारी तो अभी बाक़ी है,
इश्क़ की कुछ ज़िम्मेदारी तो अभी बाक़ी है !

अभी 
बाक़ी हैं तेरी ज़ात से और भी हैरानियाँ,
दिल-ए-नाकाम की भी सोग़वारी तो अभी बाक़ी है !

यूँ तो ये ज़माना आज़ाद-ख़यालों का है,
फ़िर भी इश्क़ पर पहरेदारी तो अभी बाक़ी है !

तेरे नाम से बदल जाती है धड़कन की लय,
दिल पर तेरी कुछ हक़दारी तो अभी बाक़ी है !

अभी तो बेआबरू हो के निकला हूँ तेरे कूचे से,
सर-ए-बाज़ार मेरी संगसारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ यारज़रा अहिस्ता ले चल मेरी मय्यत,
मेरे क़ातिल की ग़म-गुसारी तो अभी बाक़ी है !

भरें तो कैसे भरें, कि ज़ख़्म हैं दिल के,
मेरे ज़ालिम की तीमारदारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ ख़ुदा, तू ज़रा और मोहलत दे दे,
'फ़राज़' मौत की तैयारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बाक़ी= Remaining.
पर्देदारीSecrecy, Concealment.
ज़िम्मेदारी= Responsibility.
ज़ात= Personality.
हैरानियाँ= Amazements, Astonishments.
दिल-ए-नाकाम= Unsuccessful heart
सोग़वारी= Mourning
ज़माना= Era, Time.
आज़ाद-ख़याल= liberal, Broad/Open minded. 
पहरेदारी= Guarding.
लय= Melody, Tone, Rhythm
हक़दारी= Entitlement
बेआबरू= Dishonored
कूचा= Narrow street, Lane.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
संगसारी= Stoning.
ज़रा A bit.
अहिस्ता= Slowly, Softly.
मय्यत= Dead body, Corpse.
क़ातिल= Murderer.
ग़म-गुसारी= Sympathy.
ज़ख़्म= Wound
ज़ालिम= One who hurts, Oppressor, Unjust, Tyrant
तीमारदारी= Nursing, Taking care of, Looking after sick.
मोहलत= Respite, Time, Leisure.
तैयारी= Preparation

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

!!! लेकिन !!!

उसने कहा कि
मुझे प्यार है तुमसे , लेकिन....

लेकिन !
वो एक लफ़्ज़,
जो जोड़ता है,
दो जुमलों को.
लेकिन، 
इस 'लफ्ज़-ए-लेकिन' ने
तोड़ा होगा,
न जाने कितने दिलों को..

काश उसने उस 'लेकिन' को
कुछ यूँ कहा होता
कि,
शायद हम कभी न मिल पायें
लेकिन, मुझे तुमसे प्यार है..

बहुत चुभता है ये लफ्ज़-ए-लेकिन,
ज़रा एहतियात से इस्तेमाल करना

||| फ़राज़ |||

लेकिन= But
लफ़्ज़= Word
जुमला= The Sentence, Clause
लफ्ज़-ए-लेकिन= Word of But.
ज़रा= A bit.
एहतियात= Care, Caution, Precaution
इस्तेमाल= Use


मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

!!! दिल-ए-फ़ित्ना !!!

नहीं सुनता मैं अब दिल की, स्याना हो गया हूँ मैं,
इसी दिल में तो मुझको इश्क़ की चाहत में डाला था !

ज़हन ने लाख रोका थादिल-ए-फ़ित्ना सुनता था,
दिल-ए-फ़ित्ना ही था जिसने हमें उल्फ़त में डाला था !

क्यूँ दें इल्ज़ाम हम इन्सान को फ़ितनापरस्ती का,
पहल फ़ित्ना तो इब्लीस ने जन्नत में डाला था !

सबब हैरानियों का था तेरा पहले-पहल मिलना,
तेरे ही रुख़ बदलने ने मुझे हैरत में डाला था !

तेरे ही इश्क़ ने हमको बराह-ए-रास्त दिखलाई,
तेरे ही फ़िराक़ ने हमको बुरी सोहबत में डाला था !

जगा करते थे रातों को, गिना करते थे हम तारे,
तेरे ही इश्क़ ने हमको अजब कसरत में डाला था !

वो एक दरिया जो ज़रिया था मेरी हर एक तसल्ली का,
उस ही दरिया ने हमको प्यास की शिद्दत में डाला था !

जवाब बनके हैं लौटे 'फ़राज़काग़ज़ के वो पुर्ज़े,
जो ख़त इज़्हार-ए-इश्क़ की हसरत में डाला था !

||| फ़राज़ |||

स्याना= Wise, Clever, Shrewd
ज़हन= Mind
दिल-ए-फ़ित्ना= Tempted Heart
उल्फ़त= Love Affection
इल्ज़ाम= Blame,
फ़ितनापरस्ती= Worshiping of temptation.
पहल= Begining, First, Initiative.
फ़ित्ना= Temptation
इब्लीस= Satan, The Devil.
जन्नत= Heaven, Paradise.
सबब= Cause, Reason.
हैरानियां= Amazements, Astonishments, Wonders.
पहले-पहल= Initially, Firstly, Begining.
रुख़= Appearance, Face, Direction.
हैरत= Astonishment, Wonder.
बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
फ़िराक़= Separation, Absence, Departing.
सोहबत= Company, Asociation.
अजब= Strange
कसरत= Exercise
दरिया= River.
ज़रिया= Source
तसल्ली= Solace
शिद्दत= Vehemence, Severity.
काग़ज़= Paper.
पुर्ज़े= Shreds, Pieces.
ख़त= Letter
इज़्हार-ए-इश्क़= To express love.
हसरत= Desire.