सोमवार, 22 अप्रैल 2019

सच


इस दौर में वो सच कहता है,
मोमिन है या रिन्दना है !

सब सह कर हँसता रहता है,
पागल है या दीवाना है !

क्यूँ सिक्के जोड़ा करता है,
तुझको एक दिन मर जाना है !

किस शिद्दत से प्यासा होगा,
वो साग़र हो के तिश्ना है !

तरकीबें लाख लगाओ तुम,
जो होना है वो होता है !

एक बार तो मरने से पहले,
दिखला दे कितना ज़िन्दा है !

कुछ झूठे हमसे कहते हैं,
'अल्फ़ाज़तू कितना झूठा है !

तू ख़ुद को झूठा कहता है,
'अल्फ़ाज़तू कितना सच्चा है !

||| अल्फ़ाज़ |||
दौर = Time, Era, युगसमय
मोमिन = Believer, इश्वर में विश्वास रखने वाला
रिन्दना = Drunk, नशे में
शिद्दत = Vehemence, Severity
साग़र = Wine-Cup, Goblet, शराब का प्याला
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, प्यासातृषित,
तरकीब = Method, Trick, युक्ति

सोमवार, 15 अप्रैल 2019

हालात

आवारगी के हमपे ज़माने आए,
जबसे हम इस शहर में कमाने आए !

इतनी सी देर को हम घर आते हैं,
जैसे कि कोई क़र्ज़ चुकाने आए !

वक़्त बदला तो फ़िर ऐसा बदला,
तीर पे ख़ुद चल के निशाने आए !

कुछ लोग तेरा ज़िक्र छेड़ देते हैं,
जब आए तो बस आग लगाने आए !

बिछड़ के वो ख़ुश भी हैज़िन्दा भी है,
वादे भी कहाँ उसको निभाने आए !

जागे तो देखा कि तकिया नम था,
कल रात तेरे ख़्वाब सिरहाने आए !

सुर्ख़ जोड़े
 में वो आए मेरी मय्यत पे,
कुछ इस तरह वो हमको जलाने आए !

'अल्फ़ाज़हमने ख़ुद को ख़ुद ही मना लिया,
बहुत देर में वो हमको मनाने आए !

||| अल्फ़ाज़ |||

आवारगी = Wandering, Loitering, Waywardness
ज़माने = Times, Age, Era, काल, समय
क़र्ज़ = Debt, Loan, ऋण, उधार
ख़ुद = Self, Oneself, स्वयं
तीर = Arrow, बाण
ज़िक्र = Narration, Talk, बात, चर्चा
सुर्ख़-जोड़ा = Red Wedding Dress
मय्यत = Dead Body, Corpse, अर्थी, अंतिम-संस्कार

बुधवार, 10 अप्रैल 2019

ज़रुरत

अल्लाह न भगवान की ज़रुरत है,
इन्सान को इन्सान की ज़रुरत है !

दैर-ओ-हरम को बनाने से पहले,
दिलों में ईमान की ज़रुरत है !

महज़ हिफ़्ज़ करने से कुछ नहीं होगा,
दिलों में क़ुरआन की ज़रुरत है !

घर को ज़रूरी नहीं हैं ज़्यादा कमरे,
हँसते हुए दालान की ज़रुरत है !

रिश्तों को नहीं चाहिए हीरे-मोती,
रिश्तों को बस ध्यान की ज़रुरत है !

चहार-दीवारी में घुट रहा बचपन,
बच्चों को मैदान की ज़रुरत है !

सवाल उठते हैं तेरी ख़ामोशी पर,
दरिया तो तूफ़ान की ज़रुरत है !

'अल्फ़ाज़महज़ दोस्ती के रिश्ते में,
न हिन्दू न मुसलमान की ज़रुरत है !

||| अल्फ़ाज़ |||
इन्सान = Human, Mankind, मनुष्य
ज़रुरत = Requirement, Need, आवश्यकता
दैर-ओ-हरम = Temple And Mosque, मंदिर-ओ-काबा
ईमान = Belief, Conscience, Faith
हिफ़्ज़ = To Memorize, कंठस्थ
क़ुरआन = The Holy Quran
दालान = Verandah, Lobby
चहार-दीवारी = Boundary
ख़ामोशी = Silence, मौन 
दरिया = River, नदी
महज़ = Merely, Only, केवल, मात्र


शनिवार, 6 अप्रैल 2019

कश्मकश

सच की कोई भी ऐसी दवाई नहीं,
मयकशी में कोई भी बुराई नहीं !

ज़्यादा अच्छा भी होना है होता बुरा,
कुछ बुराई में कोई बुराई नहीं !

ठोकरोंतजरबेऔर कुछ एक सबक़,
और कुछ उम्र भर की कमाई नहीं !

सर्दियों का सितम उनसे पूछो जहाँ,
है अलाव नहींहै रज़ाई नहीं !

ये जो है अजनबीये था कहता कभी,
मौत मंज़ूर है पर जुदाई नहीं !

जाते-जाते वो मेरी हंसी ले गया,
ज़िन्दगी फ़िर कभी मुस्कुराई नहीं !

तेरे बिन ज़िन्दगी कश्मकश में कटी,
जिंदा रह न सकेमौत आई नहीं !

वो ग़ज़ल जिसको 'अल्फ़ाज़मिल न सके,
रोज़ सोचा किएपर सुनाई नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

मयकशी = Boozing, मदिरापान
तजरबे = Experiences, अनुभव
सबक़ = Lesson, पाठ, सीख
सितम = Oppression, Outrage, Injustice, Tyranny, अत्याचार
अलाव = Bonfire, Campfire
रज़ाई = Quilt
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
कश्मकश = Struggle, Wrangle, Tussle, खेंच-तान, संघर्ष

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

आम चुनाव

मंदिर-मस्जिद पे दांव है,
शायद फ़िर आम चुनाव है !

जितना दिखता है ख़बरों में,
उतना भी कहाँ तनाव है !

फ़िर क़र्ज़ों की माफ़ी होगी,
फ़िर से ख़बरों में गाँव है !

बस धुआँ हैआग नहीं होगी,
कच्ची लकड़ी का अलाव है !

बस सूँघोखा न पाओगे,
वादों का ख़याली पुलाव है !

फ़िर अच्छे कल की बातें हैं,
फ़िर से काग़ज़ की नाव है !

'अल्फ़ाज़तू सच क्यूँ कहता है,
अब झूठ को मिलता भाव है !

||| अल्फ़ाज़ |||

दांव = Gamble
आम चुनाव = General Elections
तनाव = Tension
क़र्ज़ माफ़ी = Loan Waiving
अलाव = Bonfire, Campfire
ख़याली-पुलाव = Daydreaming, Building A Castle In The Air
भाव = Rate, Price

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

ज़िन्दगी

ख़्वाह-मख़ाह के डर में गुज़री,
ज़िन्दगी अगर-मगर में गुज़री !

तेरे इश्क़ में सारी जवानी,
एक गर्मी की दोपहर में गुज़री !

जैसे गाँव से रेलगाड़ी गुज़रे,
ज़िन्दगी ऐसे शहर में गुज़री !

रात को रो लिए अंधेरों में,
मत पूछिये क्या सहर में गुज़री !

गुनाहगारी में बाँकपन गुज़रा,
पीरी तो दर-गुज़र में गुज़री !

पल भर को सोचिये तो लगता है,
जैसे ज़िन्दगी पल भर में गुज़री !

पाँव फैले नहीं मगर ढके भी नहीं,
ज़िन्दगी छोटी सी चादर में गुज़री !

मेरे हाल से बे-ख़बर है 'अल्फ़ाज़',
ज़िन्दगी जिसकी फ़िकर में गुज़री !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़्वाह-मख़ाह = Just Like That, यूँ हीऐसे ही
अगर-मगर = If-But
सहर = Morning, प्रभातसुबह
गुनाहगारी = Sinning, पाप
बाँकपन = Teenage, Adolescence, लड़कपन
पीरी = Old Age, बुढ़ापा
दर-गुज़र = Pardon, Forgiveness, क्षमा करना
बे-ख़बर = Ignorant, Uninformed, अन्जान
फ़िकर = Concern, Thought, चिंता