रविवार, 28 जनवरी 2018

अहद-ओ-अना !!!

ज़ख़्म देने वाला तो वही पुराना है,
फ़िर भी लगता है कि चोट नई हो जैसे !

उसके अश्कों में यूँ बहे मेरे अहद-ओ-अना, 
नाव काग़ज़ की सैलाब में बही हो जैसे !

जब नींद से जागा तो आग़ोश तन्हा था,
तू रात भर ख़्वाबों में रही हो जैसे !

ख़ुद को बहलाता हूँ मैं एक ख़ुश-गुमानी से,
रास्ता अब भी मेरा तू देख रही हो जैसे !

कोई आहट, कोई एहसास, कोई जुम्बिश न हुई,
तू दबे पाँव मुझे छोड़ गई हो जैसे !

उसके क़दमों के निशाँ भी तो बाक़ी न रहे,
मुझको आने में बहुत देर हुई हो जैसे !

अब नहीं आती है होंठों पर पहले सी हंसी,
ज़िन्दगी में कोई तो कमी हो जैसे !

दम निकलता नहीं 'फ़राज़' न जाने क्यूँ तेरा,
दिल में कोई हसरत अधूरी सी हो जैसे !

||| फ़राज़ |||

ज़ख़्म = Wound
अश्क = Taers
अहद= Promise
अना= Ego, Self
काग़ज़= Paper
सैलाब= Flood, Deluge.
आग़ोश= Embrace.
तन्हा= Hollow, Alone, Empty.
ख़ुश-गुमानी= Misconception.
एहसास= Feeling, Perception.
जुम्बिश= Vibration, Jerk, Motion.
दबे पाँव= Tip-toe, Walk stealthily.
क़दमों के निशाँ= Footprints.
दम= Breath, Life.
हसरत= Unfulfilled desire.

शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

मोमिन !!!

मुझे मस्जिद में जाना है, तुझे मंदर में जाना है,
ख़ुदा ही एक है जिसको, सभी के घर में जाना है !

तेरी हस्ती ही क्या है जो, तू ये बतलायेगा रब को,
ख़ुदा को किस इमारत में ख़ुदा का घर बनाना है !

बड़ा ही फ़ख़्र  है ग़ाफ़िल तुझे अपनी सख़ावत पर,
तू क्या दे पायेगा उस रब को, कि उसका तो ज़माना है !

लगा ले सारी तरकीबें, ज़माने को कमाने की,
यही एक सच है इंसां का, कि ख़ाली हाथ जाना है !

मुझे है जानना मक़सद, मेरे दुनिया में आने का,
तू कर ख़्वाहिश ज़माने की, मुझे तो ख़ुद को पाना है !

इसी मिट्टी से पैदा हैं सभी मोमिन सभी काफ़िर,
यही तामीर-ए-मस्जिद है, यही बुत का भी ख़ाना है !

इसी मिट्टी से तू पैदा, इसी मिट्टी से मैं पैदा,
फ़र्क़ क्यूँ है अक़ीदे में, बहुत मुश्किल बताना है !

नज़र तुझको भी एक दिन वो, मलक-उल-मौत आयेंगे,
कि हर ज़िन्दा बशर के रु-ब-रु ये पेश आना है !

शुक्र इतना भी क्या कम है की मैं ज़िन्दा सलामत हूँ,
कब्र का हाल तो 'फ़राज़', महज़ मुर्दों ने जाना है !

||| फ़राज़ |||

मस्जिद= Mosque.
मंदर= Temple.
हस्ती= Existence
रब= God.
ख़ुदा= God.
इमारत= Building
फ़ख़्र= Pride, A thing to be proud of boasting.
ग़ाफ़िल= Negligent, Neglectful, Oblivious.
सख़ावत= Generosity.
ज़माना= Time, World.
तरकीबें= Tricks
इंसां= Human, man, mankind
मक़सद= Intention, purpose, object.
ख़्वाहिश= Wish, Will.
मोमिन= Believer (in Islam), Pious.
काफ़िर= Infidel, Impious.
तामीर-ए-मस्जिद= Construction of Mosque
बुत= Idol.
ख़ाना= House
फ़र्क़=Difference.
अक़ीदा= Fundamental doctrine of Belief. Tenet.
मलक-उल-मौत= Say, "The Angel Of Death Will Take You Who Has Been Entrusted With You. Then To Your Lord, You Will Be Returned." (Quran Surah 32:11)
ज़िन्दा= Alive, Living.
बशर= Man, Human being.
रु-ब-रु= Face to face, in person, In front of.
पेश= Happen.
शुक्र= Thank
सलामत= Safe. 
कब्र= Grave.
महज़= Merely, only.
मुर्दा= Dead.

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

तू बता !!!

मुझको भी ज़िद है ये कि, मैं वक़्त को बदल दूँ,
सूरज की र्दिशों की रफ़्तार तू बता !

फ़िर तेरी अंजुमन में, आया है ज़िक्र मेरा,
चर्चा है किस ख़ता का इस बार तू बता !

यूँ तो हैं सब बराबर, अल्लाह की नज़र में,
महँगा है क्यूँ रूपये से दीनार तू बता !

मुझको भी जाननी हैईमां की मेरे क़ीमत,
किस सम्त है ज़मीर का बाज़ार तू बता !

उस माँ की कोख में तो, बंटवारा न था कोई,
किसने उठाई घर में दीवार तू बता !

कभी मस्जिद के नाम पर, कभी मंदिर के नाम पर,
कब तक चुनेगा यूँही सरकार तू बता !

एक दिन ख़रीदने को, बिकता हूँ छः दिनों तक,
हफ़्ते में क्यूँ है एक ही इतवार तू बता !

पी कर के तू है कहता, कल से नहीं पियूँगा,,
क्यूँ है 'फ़राज़' इतना होशियार तू बता !

||| फ़राज़ |||

ज़िद= Insistence.
गर्दिश= Revolution, Circulation.
रफ़्तार= Speed, Behaviour, Manner
अंजुमन= Society, Party
ज़िक्र= Remembrance, Talk
चर्चा= Gossip, Rumor.
ख़ता= Mistake, Fault
रुपया= Indian Currency.
दीनार= Kuwaiti Currency.
ईमां= Conscience.
क़ीमत= Price, Value.
सम्त= Direction.
ज़मीर= Conscience.
बाज़ार= Market.

सोमवार, 22 जनवरी 2018

नक़्श-ए-क़दम !!!

आँखों से छलक ही जाती है,
ख़ुशियों की ख़बर को क्या कहिये !

पढ़ लेते हैं मेरी ख़ामोशी
अपनों की नज़र को क्या कहिये !

बेफ़िक्र सा कुछ हो जाता हूँ,
बचपन का ज़िक्र को क्या कहिये !

ज़िन्दगी सिमट के रह जाती है,
शहरों में हो घर तो क्या कहिये !

वाक़िफ़ हूँ ख़ुदा के हुक्मों से,
दिल में न हो डर तो क्या कहिये !

हर नक़्श-ए-क़दम पर इबरत है
'फ़राज़' के सफ़र को क्या कहिये !

||| फ़राज़ |||

ख़बर= News
ख़ामोशी= Silence
नज़र= Vision
बेफ़िक्र= Casual, Carefree.
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk

वाक़िफ़= aware, informed, Acquainted.

हुक्म= Order

नक़्श-ए-क़दम = Footprints.

इबरत= Lesson/ Admonition

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

शब्-ए-तन्हाई !!!

शब्-ए-तन्हाई थी, कि काटे नहीं कटती थी,
बस इसी वास्ते मैं एक जाम ख़रीद लाया हूँ !

जानता हूँ कि ये मरहम भी कामिल तो नहीं है,
कुछ लम्हों का सही, मैं आराम ख़रीद लाया हूँ !

अब दोस्तों पे ख़र्च करूँ, या तसव्वुर-ए-यार पर,
दिन भर की कमाई से मैं ये शाम ख़रीद लाया हूँ !

ये ज़माना एक दिन तुझको भी दीवाना कहेगा,
मैं भी इश्क़ करके एक इल्ज़ाम ख़रीद लाया हूँ !

सिर्फ़ दिल-ए-नादाँ ही उसकी उम्मीद लगाये बैठा है,
यूँ तो मैं अपनी मौत का हर सामान ख़रीद लाया हूँ !

बता कैसे हरायेगा अब तू मुझे इंसाफ़ के खेल में,
तू वकील ही तो लाया है, मैं हुक्काम ख़रीद लाया हूँ !

तुझसे ही सीखा है मैंने सियासत का सबक़,
मैं भी ईमान बेचकर आवाम ख़रीद लाया हूँ !

आज फ़िर मेरे ज़मीर को कोई ख़रीद न सका,
मैं न बिक कर भी अपना दाम ख़रीद लाया हूँ !

वो रंगीन गुब्बारे इतने महंगे भी न लगे 'फ़राज़',
मैं किफ़ायत से बच्चों की मुस्कान ख़रीद लाया हूँ !

||| फ़राज़ |||

शब्-ए-तन्हाई= Night of loneliness.
वास्ते= For, for the cake of, 
जाम= Glass of wine.
मरहम= Ointment.
कामिल= Perfect, Complete.
तसव्वुर-ए-यार= Thinking about the beloved.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
दिल-ए-नादाँ= Innocent heart.
इंसाफ़= Justice
वकील= Lawyer, Advocate
हुक्काम= Judges, Magistrate, Authorities.
सियासत= Politics, Administration.
ईमान= Conscience, Faith.
आवाम= Public, Common People.
ज़मीर= Conscience, Heart, Pronoun.
किफ़ायत= Economy, careful management of money.

सोमवार, 15 जनवरी 2018

ख़ैर-ख़बर

हमने समझा था कि दिल संभल गया होगा,
जाने क्या बात है कि आँख भर आती है !

न पूछ क़िस्सा तू मेरी मोहब्बत का,
चोट सीने की पुरानी सी उभर आती है !

पलकों पे छोड़ जाती है भीगे लम्हें,
दिल में जब यादों की लहर आती है !

माना कि तू मेरा कोई नहीं लगता,
अच्छा लगता है जब ख़ैर-ख़बर आती है !

कि वो क़ुर्बत नहीं, महज़ तिजारत है,
वो मोहब्बत, जो शर्तों पर आती है !

नाख़ुदा का किरदार भी पता चल जाता है,
कश्तियाँ 'फ़राज़' जब बीच भंवर आती हैं !

||| फ़राज़ |||

क़िस्सा= Tale, Story.
ख़ैर-ख़बर= News/ Information of wellness/goodness.
क़ुर्बत= vicinity, nearness.
महज़= Merely, Only
तिजारत= Trade, Commerce.
शर्त= Condition, Term, Stipulation.
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, Captain/Commander of the ship.
किरदार= Character.
कश्ती= Boat.
भंवर= whirlpool vertex.

रविवार, 14 जनवरी 2018

आरज़ी !!!

माना कि शग़्ल है ये बंद आँखों का,
झूठा ही सहीशुक्र है एक ख़्वाब तो है !

नज़र भर देख लेने में भला हर्ज भी क्या है,
कि आरज़ी ही सहीरु-ब-रु सराब तो है !

अब तलक तो यही सोच कर संभाल रखा है,
कि सूखा ही सही, मगर ये वही गुलाब तो है !

मेरी ही चाहत थी कि सबकुछ मुझे बेपनाह मिले,
अब दर्द-ए-दिल है तो क्या हुआबेहिसाब तो है !

दिल-ए-बर्बाद को डर था कि जी पायेंगे कैसे,
और हमने दिल को समझायाकि शराब तो है !

क्या महज़ इस तर्क पे मैं तुझे मुसलमां कह दूं ?
कि तू शराबी है तो क्याअहल-ए-किताब तो है ?

शायद ख़ुदा मुझे अभी इतना भी नहीं भूला है,
कि राहतें न सही तो क्यामुझपे अज़ाब तो है !

कुछ तो सीखेगा हुनर 'फ़राज़तू हर शय से,
कि रू-ब-रु साहिल नहीं तो क्यासैलाब तो है !

|||फ़राज़|||

शग़्ल= Hobby
शुक्र= Thank
ख़्वाब= Dream
हर्ज= Loss, Harm, Trouble
आरज़ी= Temporary.
रू-ब-रु= In front of, Face to face.
सराब= Mirage, Illusion. 
तलक= Till
बेपनाह= Boundless, Limitless, Unlimited, Unending.
दर्द-ए-दिल= Heart's Grief,
बेहिसाब= Countless, Unlimited, Excessive.
दिल-ए-बर्बाद= Ruined heart.
महज़= Merely, Only.
तर्क= Argument, Supposition, Reasoning.
मुसलमां= The Muslim
अहल-ए-किताब= People of the divine book (Referring to The Muslim, The Jews, The Christians, and The Zoroastrians)
राहतें= Rest, Comfort, Ease.
अज़ाब= Torment, Agony.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
शय= Things, Object.
साहिल= The sea-shore, Beach, Cost.
सैलाब= Flood, Deluge, Inundation, Torrent.


बुधवार, 10 जनवरी 2018

तीर-ए-नज़र !!!

उसके तरकश में बाक़ी है कई ज़ुल्म-ओ-सितम,
फ़िलहाल तो ये वार तीर-ए-नज़र के देखिये !

जान भी मांगेगा एक दिन ये दिल लेने वाला,
सब्र कीजिये और फ़िर ईनआ' सब्र के देखिये !

चाँद भी रंजिशें रखता है जिसकी सबाहत से,
एक रात उसके शहर में भी ठहर के देखिये !

मैं हर सुबह क्यूँ मुस्कुराता हुआ जागता हूँ,
कभी ख़ुद को मेरे ख़्वाबों में आ कर के देखिये !

सुना है रात भर जागते हैं इश्क़ करने वाले,
नींद से रब्त न हो तो इश्क़ कर के देखिये !

सुना है की वो कुछ भी संभाल कर नहीं रखता,
ज़रा उनसे दिल तो अपना मांग कर के देखिये !

हाल-ए-दिल उनका भी पता चल ही जाएगा,
हाल-ए-दिल अपना ज़ाहिर तो करके देखिये !

इजाज़त हो तो 'फ़राज़' आपको ग़ज़ल कर दे
और फ़िर अश'आर अपने शायर के देखिये !

|||
फ़राज़ |||

तरकश= Quiver.
ज़ुल्म-ओ-सितम= Tyranny, Oppression.
फ़िलहाल= As of now, At present.
तीर-ए-नज़र= Arrow of glances.
सब्र= Patience, Endurance.
ईनआ'म= Prize, Reward
रंजिश= Ill-will, Hostility.
सबाहत= Beauty, Gracefulness, Comeliness.
रब्त= Intimacy, Bond, Connection.
हाल-ए-दिल= Condition of heart.
ज़ाहिर= Open, Reveal.
इजाज़त= Permission.
अश'आर= Couplets.

मंगलवार, 9 जनवरी 2018

दिलनवाज़ी

लगता है हवायें उसको छू के गुज़री हैं,
मौसम-ए-बहार आने की ख़बर आती है !

इतना हैराँ न हो उसके 'हाँ' कह देने पर,
किस्मत भी कभी ख़बर कहकर आती है?

भला हम रब्त क्यूँ रखें उन सितारों से,
अब मेरी रातों में वो कामिल क़मर आती है !

वो रु-ब-रु हो या ख़याल बन कर आये,
कि बस देखते रहिये वो जब नज़र आती है !

कोई दौर-ए-मख़सूस नहीं दिलनवाज़ी के लिए,
अमां इश्क करने की भी क्या कोई उम्र आती है?

वो हार जाती है मुझसे मेरी ख़ुशी के लिए,
मैं हार जाता हूँ जब वो ज़िद पे उतर आती है !

हाल-ए-दिल वो मुझसे छुपाये भी तो कैसे,
कशमकश तो उसके चेहरे पे नज़र आती है !

ख़ुदा ही ख़ैर करे अब मेरे दिल की 'फ़राज़' ,
सुना है कि आज वो पहलू बदल कर आती है !

|||फ़राज़|||

मौसम-ए-बहार= Spring season.
हैराँ= Amazed, Confounded, Astonished.
रब्त= Intimacy.
क़मर= The moon
नुमूदार= Present, Apparent, Visible, Evident.
ख़याल= Thought, Imagination.
दौर-ए-मख़सूस= Specified/Special/Reserved time.
दिलनवाज़ी= Heart pleasing.
हाल-ए-दिल= Condition of heart.
कैफ़ियत= Situation, Circumstances.
कशमकश=  struggle, tussle, wrangle..
ख़ैर= Good, Safe, Well.