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मंगलवार, 9 जनवरी 2018

दिलनवाज़ी

लगता है हवायें उसको छू के गुज़री हैं,
मौसम-ए-बहार आने की ख़बर आती है !

इतना हैराँ न हो उसके 'हाँ' कह देने पर,
किस्मत भी कभी ख़बर कहकर आती है?

भला हम रब्त क्यूँ रखें उन सितारों से,
अब मेरी रातों में वो कामिल क़मर आती है !

वो रु-ब-रु हो या ख़याल बन कर आये,
कि बस देखते रहिये वो जब नज़र आती है !

कोई दौर-ए-मख़सूस नहीं दिलनवाज़ी के लिए,
अमां इश्क करने की भी क्या कोई उम्र आती है?

वो हार जाती है मुझसे मेरी ख़ुशी के लिए,
मैं हार जाता हूँ जब वो ज़िद पे उतर आती है !

हाल-ए-दिल वो मुझसे छुपाये भी तो कैसे,
कशमकश तो उसके चेहरे पे नज़र आती है !

ख़ुदा ही ख़ैर करे अब मेरे दिल की 'फ़राज़' ,
सुना है कि आज वो पहलू बदल कर आती है !

|||फ़राज़|||

मौसम-ए-बहार= Spring season.
हैराँ= Amazed, Confounded, Astonished.
रब्त= Intimacy.
क़मर= The moon
नुमूदार= Present, Apparent, Visible, Evident.
ख़याल= Thought, Imagination.
दौर-ए-मख़सूस= Specified/Special/Reserved time.
दिलनवाज़ी= Heart pleasing.
हाल-ए-दिल= Condition of heart.
कैफ़ियत= Situation, Circumstances.
कशमकश=  struggle, tussle, wrangle..
ख़ैर= Good, Safe, Well.