रविवार, 15 अप्रैल 2018

!!! तलाश !!!

जागती आँखों से एक सपना ढूँढता हूँ,
जो पराया हो गया, वो अपना ढूँढता हूँ !

इश्क़ भी करता हूँ, सुकून भी चाहता हूँ,
सहरा के सफ़र में मैं सायबाँ ढूँढता हूँ !

मैं नहीं करता किसी मख़्लूक़ को सजदा,
ख़ुदाओं के मजमे में इंसान ढूँढता हूँ !

चलो बताता हूँ कि ख़ुदा की हक़ीकत क्या है,
वालिदैन नज़र आते हैं, जब ख़ुदा ढूंढता हूँ !

जब से जाना कि कोई बे-वजह नहीं मिलता,
तब से हर मुलाक़ात में नफ़ा ढूँढता हूँ !

बाज़ार की बोतलों से मेरी प्यास नहीं बुझती.
अपने आँगन में अपना कुआँ ढूँढता हूँ !

ग़म न कर जो कोई इल्ज़ाम मैं तुझको दे दूँ,
ऐ बेवफ़ा ग़ज़ल, मैं तेरा क़ाफ़िया ढूंढता हूँ !

आप ही ढूँढिये जी-हुज़ूरी करने वाले,
'फ़राज़' मैं तो दुश्मन भी खरा ढूँढता हूँ !

||| फ़राज़ |||



सुकून= Peace, Tranquility.
सहरा= Desert
सायबाँ= Shade, Shelter
मख़्लूक़= Creation Of God
ख़ुदाओं= Gods
मजमा= Crowd
हक़ीकत= Reality
वालिदैन= Parents
बे-वजह= Without Cause
नफ़ा= Profit.
ग़म= Sorrow, Grief.
इल्ज़ाम= Accusation, Blame
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya
जी-हुज़ूरी= Flattering, Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honor, 
खरा= Real, Genuine

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

!!! तजरबा !!!

शायद मेरी वफ़ा का सिला दे गया मुझे,
रातों को जागने की सज़ा दे गया मुझे !

ज़िन्दगी जिसके बिना बद-दुआ सी लगती है,
जाते-जाते वो जीने की दुआ दे गया मुझे !

आज फ़िर मैंने तुझसे तेरे वादों की बात की,
आज फ़िर भूलने का तू मशवरा दे गया मुझे !

कैसे भूलूँ मैं तुझे ओ मुझको भूलने वाले,
उम्र-ए-दराज़ का तू गिला दे गया मुझे !

अच्छा ही हुआ कि अब तू मिलता नहीं मुझसे,
फ़ासला हर बार तू नया दे गया मुझे !

ये दुश्मन-ए-जां कभी मेरी जान भी हुआ करता था,
वक़्त भी ये क्या मरहला दे गया मुझे !

ज़हर दे गया तो कभी दवा दे गया मुझे,
हर बार तजरबा तू नया दे गया मुझे !

दर्द कहातो कभी इश्क़ को आराम भी कहा,
'फ़राज़हर हकीम एक नुस्ख़ा दे गया मुझे !

||| फ़राज़ |||

वफ़ा= Fidelity, Faithful
सिला= Gift, Reward
सज़ा= Punishment
बद-दुआ= Curse
वादा= Promise
मशवरा= Advice
उम्र-ए-दराज़= Long Life
गिला= complaint, lamentation, blame
फ़ासला= Distance
दुश्मन-ए-जां= Enemy Of The Heart, Beloved
मरहला= A Stage, An Inn, A Difficulty
तजरबा= Experience
हकीम= Sage, Philosopher, Physician, Doctor
नुस्ख़ा= Prescriptions

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

!!! नाम-ए-फ़राज़ !!!

कोई न जोड़ पाया है कभी टूटे हुए दिल को,
तेरी शीशागरी पे तुझको इतना नाज़ बेजा है !

कि उसके नाज़ नख़रों के सवाली और भी होंगे,
मनाने वो न आयेगा, कि तू नाराज़ बेजा है !

तुझे तो जीतना है आसमान की हर बुलंदी को,
अगर मंज़िल ज़मीं है तो तेरी परवाज़ बेजा है !

नहीं थमते तेरे मन के ये कारोबार दुनिया के,
महज़ कसरत ज़बानी हो तो वो नमाज़ बेजा है !

तजरबे हैं बुरे लेकिन सबक़ अच्छा मैं देता हूँ,
तेरी इस्लाह न कर पायें तो मेरे अल्फ़ाज़ बेजा हैं !

तेरे मेरे कलम में तो स्याही एक जैसी है,
अगर बेहतर न मैं लिखूं तो नाम-ए-फ़राज़ बेजा है !

||| फ़राज़ |||


शीशागरी= Art of glass-making.
नाज़= Pride, Proud.
बेजा= Fruitless, Unbecoming, Unfair, Unbefitting.
नख़रा= Coquetry
सवाली= A beggar, A petitioner
नाराज़= Displeased, Offended.
बुलंदी= High place, Height, Loftiness
मंज़िल= Destination
परवाज़= Flight
कारोबार= Business, Trade, affair
महज़= Merely, Only
कसरत= Exercise
ज़बानी= Oral, Verbal
तजरबे= Experiences,
सबक़= Lesson
इस्लाह= Correction, Reform
अल्फ़ाज़= Words
स्याही= Ink
बेहतर= Better

नाम-ए-फ़राज़= Name of Faraaz (In respect of the great Urdu poet Ahmed Faraz Sir)

शुक्रवार, 30 मार्च 2018

!!! दीन !!!

मुफ़्लिसी में अमीरी का हुनर होना भी दीन है,
अपने हालात पर सब्र होना भी दीन है !

यूँ तो इन्सान की फ़ितरत है ख़्वाहिश करना,
अपनी चादर पैरों के बराबर होना भी दीन है !

सारे आलम का इल्म हो, ये ज़रूरी तो नहीं,
पड़ोसी की ख़ैर-ख़बर होना भी दीन है !

इस मादर-ए-ज़मीं के कुछ क़र्ज़ तो चुका,
घर के आँगन में शजर होना भी दीन है !

ख़ाना-ए-काबा की ज़ियारत हो, ये ज़रुरी तो नहीं,
माँ-बाप पर मोहब्बत की नज़र होना भी दीन है !

यूँ तो हर इन्सान से गुनाह हो ही जाता है,
मगर दिल में अल्लाह का डर होना भी दीन है !

संग-ए-मरमर के महलों से भी जन्नत नहीं मिलती,
क़ब्रिस्तान में मिट्टी की क़ब्र होना भी दीन है !

इतना महँगा भी तो नहीं है नेक सलाह देना,
भटके हुओं का रहबर होना भी दीन है !

नज़र को ख़ुदा की तलाश तो हरगिज़ रही है,
मगर अक़ीदे का बे-नज़र होना भी दीन है !

अल्लाह को पसंद है 'अल्फ़ाज़नदामत करना,
अपनी लग़्ज़िशों की ख़बर होना भी दीन है !


||| अल्फ़ाज़ |||

मुफ़्लिसी= Poverty
हुनर= Talent
दीन= Religion, Belief
हालात= State, Condition, The Present Time
सब्र= Patience, Endurance
फ़ितरत= nature
ख़्वाहिश= wish, request, inclination, will
आलम= The Universe, World.
इल्म= Knowledge
ख़ैर-ख़बर= News About Well Being
मादर-ए-ज़मीं= Mother Earth
क़र्ज़= Debt
शजर= Tree
ख़ाना-ए-काबा= The Kaaba Is A Building At The Centre Of Islam's Most Important Mosque, Al-Masjid Al-Ḥarām, In The Hejazi City Of Mecca, Saudi Arabia. It Is The Most Sacred Site In Islam.
ज़ियारत= Pilgrimage, Visiting A Shrine
संग-ए-मरमर=  Sang-E-Marmar, The White Stone, Used To Build Taj Mahal, Comes From A Pyramidal Peak In The Batura Muztagh, At The End Of A Spur Ridge Running Southwest From Pasu Sar In Pakistan. It Lies Between The Muchuhar Glacier, On The West, And The Shispare (Or Hasanabad) Glacier On The East.
महल= A Mansion Or Palace.
क़ब्रिस्तान= Cemetery, Graveyard
क़ब्र= Grave
नेक= Good, Virtuous.
सलाह= Advice
रहबर= Guide
तलाश= Search
हरगिज़= Ever
अक़ीदा= Fundamental Doctrine Of Belief, Tenet
बे-नज़र= Without Sight, 
पसंद= Likeness, Preference
नदामत= Regret, Repentance, Shame
लग़्ज़िश= Blunder, Error, Mistake

मंगलवार, 27 मार्च 2018

!!! तलब !!!

आज संभालता नहीं मुझसे राज़ तेरा,
आज लब-कुशाई की तलब रखता हूँ !

आज फ़िर आया हूँ तेरी महफ़िल में,
आज फ़िर जग-हँसाई की तलब करता हूँ !

क्या करूं कि तुझ सा बे-हया तो नहीं,
यूँ तो बेवफ़ाई की तलब रखता हूँ !

काश कोई माटी की गुल्लक साबुत होती,
सिक्कों की शहंशाही की तलब रखता हूँ !

मुझे भी कड़वी तो नहीं लगती झूठी तारीफ़,
फ़िर भी तुझसे सच्चाई की तलब रखता हूँ !

जिसकी हिफ़ाज़त में इन्सान लगे रहते हैं,
उस ख़ुदा से मसीहाई की तलब रखता हूँ !

मैं ख़याल हूँ 'अल्फ़ाज़' मुझे ज़ाहिर कर दे,
आज अपनी मुँह-दिखाई की तलब रखता हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||


लब-कुशाई= Lip-Opening.
तलब= Demand, Desire
महफ़िल= Party, Gathering
जग-हँसाई= Ridicule Of The World
बे-हया= Shameless, Immodest
बेवफ़ाई= Faithlessness, Treachery
गुल्लक= Piggybank
साबुत= Unbroken
सिक्कों= Coins
शहंशाही= Kingship, Royalty, Imperialism
तारीफ़= Praise, Admiration,
हिफ़ाज़त= Guarding, Protection, Security
मसीहाई= Messianism (In Abrahamic Religions, Messianism Is The Belief And Doctrine That Is Centered On The Advent Of The Messiah, Who Acts As The Chosen Savior And Leader Of Humanity By God.)
ख़याल= Thought
ज़ाहिर= Apparent, Evident, Open
मुँह-दिखाई= Unveil The Face/Secret.

शनिवार, 24 मार्च 2018

!!! मयकशी !!!

न रख हिसाब अब तू हर एक जाम का,
ये सिलसिला तो है अब हर एक शाम का !

अब ज़हन की सुनूँ मैंया मयकशी करूँ मैं,
एक मस'अला रु-ब-रु है दिल के आराम का !

क्या ख़ूब तिश्नगी हैदरकार बे-ख़ुदी है,
कर एहतिमाम अब तो बादा-ओ-जाम का !

तूने ही ग़म दिए हैंमरहम भी अब तू ही दे,
मुझको पता बता दे साक़ी-ओ-जाम का !

मय-कश करे दुआ तो, सुनता नहीं ख़ुदा है,
अब क्या जवाब दूँ मैं तेरे सलाम का !

तकलीफ़ न अब कोई हैग़म याद अब नहीं है,
होश-ओ-हवास इतना भी किस काम का !

तू कोशिश जारी रखऔर सब्रदारी रखा,
बेशक़ जवाब आएगा तेरे सलाम का !

मुझको कहो बुरा पर मुझको सुना करो तुम,
इंसान तो ग़लत है 'अल्फ़ाज़', शायर है काम का !

||| अल्फ़ाज़ |||

हिसाब= Account
जाम= Reply To The Glass Of Wine
सिलसिला= Chain, Series, Succession
ज़हन= Mind
मयकशी= Boozing, To Drink
मस'अला= Problem, Matter
रु-ब-रु= Face To Face
ख़ूब= Good, Pleasant
तिश्नगी= Thirst, Desire, Longing
दरकार= Necessary, Required
बे-ख़ुदी= Intoxication
एहतिमाम= Preparation, Planning
बादा-ओ-जाम= Wine And Glass
ग़म= Grief, Sorrow
मरहम= Ointment
साक़ी-ओ-जाम= One Who Serves Wine-And-Glass Of Wine 
मय-कश= Drinker
जवाब= Answer, Reply
सलाम= Is An Arabic Word That Literally Means" Peace", But Is Also Used As A General Greeting,
तकलीफ़= Trouble, Difficulty
होश-ओ-हवास= Sense And Understanding, The Presence Of Mind
कोशिश= Effort, Attempt, Try
जारी= Running, Flowing, Proceeding, Continue
सब्रदारी= Patience
बेशक़= Definite, Doubtless