न रख हिसाब अब
तू हर एक जाम का,
ये सिलसिला तो है अब हर
एक शाम का !
अब ज़हन की
सुनूँ मैं, या मयकशी करूँ
मैं,
एक मस'अला रु-ब-रु है
दिल के आराम का !
क्या ख़ूब तिश्नगी है, दरकार बे-ख़ुदी है,
कर एहतिमाम अब
तो बादा-ओ-जाम का !
तूने ही ग़म दिए
हैं, मरहम भी
अब तू ही दे,
मुझको पता बता दे साक़ी-ओ-जाम का !
मय-कश करे दुआ तो, सुनता
नहीं ख़ुदा है,
अब क्या जवाब दूँ
मैं तेरे सलाम का !
तकलीफ़ न अब कोई है, ग़म याद अब
नहीं है,
होश-ओ-हवास इतना भी किस
काम का !
तू कोशिश जारी रख, और सब्रदारी रखा,
तू कोशिश जारी रख, और सब्रदारी रखा,
बेशक़ जवाब आएगा
तेरे सलाम का !
मुझको कहो बुरा पर मुझको सुना करो तुम,
इंसान तो ग़लत है 'अल्फ़ाज़', शायर है काम
का !
||| अल्फ़ाज़ |||
||| अल्फ़ाज़ |||
हिसाब= Account
जाम= Reply
To The Glass Of Wine
सिलसिला= Chain, Series,
Succession
ज़हन= Mind
मयकशी= Boozing,
To Drink
मस'अला= Problem,
Matter
रु-ब-रु= Face
To Face
ख़ूब= Good,
Pleasant
तिश्नगी= Thirst,
Desire, Longing
दरकार= Necessary,
Required
बे-ख़ुदी= Intoxication
एहतिमाम= Preparation,
Planning
बादा-ओ-जाम= Wine And Glass
ग़म= Grief, Sorrow
मरहम= Ointment
साक़ी-ओ-जाम= One Who Serves
Wine-And-Glass Of Wine
मय-कश= Drinker
जवाब= Answer, Reply
सलाम= Is An Arabic Word
That Literally Means" Peace", But Is Also Used As A
General Greeting,
तकलीफ़= Trouble,
Difficulty
होश-ओ-हवास= Sense
And Understanding, The Presence Of Mind
कोशिश= Effort,
Attempt, Try
जारी= Running,
Flowing, Proceeding, Continue
सब्रदारी= Patience
बेशक़= Definite, Doubtless