be-haya लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
be-haya लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 27 मार्च 2018

!!! तलब !!!

आज संभालता नहीं मुझसे राज़ तेरा,
आज लब-कुशाई की तलब रखता हूँ !

आज फ़िर आया हूँ तेरी महफ़िल में,
आज फ़िर जग-हँसाई की तलब करता हूँ !

क्या करूं कि तुझ सा बे-हया तो नहीं,
यूँ तो बेवफ़ाई की तलब रखता हूँ !

काश कोई माटी की गुल्लक साबुत होती,
सिक्कों की शहंशाही की तलब रखता हूँ !

मुझे भी कड़वी तो नहीं लगती झूठी तारीफ़,
फ़िर भी तुझसे सच्चाई की तलब रखता हूँ !

जिसकी हिफ़ाज़त में इन्सान लगे रहते हैं,
उस ख़ुदा से मसीहाई की तलब रखता हूँ !

मैं ख़याल हूँ 'अल्फ़ाज़' मुझे ज़ाहिर कर दे,
आज अपनी मुँह-दिखाई की तलब रखता हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||


लब-कुशाई= Lip-Opening.
तलब= Demand, Desire
महफ़िल= Party, Gathering
जग-हँसाई= Ridicule Of The World
बे-हया= Shameless, Immodest
बेवफ़ाई= Faithlessness, Treachery
गुल्लक= Piggybank
साबुत= Unbroken
सिक्कों= Coins
शहंशाही= Kingship, Royalty, Imperialism
तारीफ़= Praise, Admiration,
हिफ़ाज़त= Guarding, Protection, Security
मसीहाई= Messianism (In Abrahamic Religions, Messianism Is The Belief And Doctrine That Is Centered On The Advent Of The Messiah, Who Acts As The Chosen Savior And Leader Of Humanity By God.)
ख़याल= Thought
ज़ाहिर= Apparent, Evident, Open
मुँह-दिखाई= Unveil The Face/Secret.