सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

!!! शाम-ए-ग़म !!!

शाम-ए-ग़म कभी तू यूँ भी तो बन के आ,
कि तन्हाई तो हो ‘फ़राज़’, ग़म-ए-यार न हो !

||| फ़राज़ |||

शाम-ए-ग़म(Shaam-e-Gham) = Evening of Sorrow
तन्हाई (Tanhai) = Solitude, Loneliness
ग़म-ए-यार= Sorrow of beloved.

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

!!! मुकम्मल !!!

इश्क़,
एक अधूरापन,
जो मुकम्मल है
अपने अधूरेपन में...

||| फ़राज़ |||

मुकम्मल= Perfect, Complete

!!! इज़्हार-ए-इश्क़


इज़्हार-ए-इश्क़ की ख़ातिर, कई अल्फ़ाज़ सोचे थे ,
ख़ुद ही को भूल बैठे हम, कि जब तुम सामने आये !!!

||| फ़राज़ |||

अल्फ़ाज़= Words.
इज़्हार-ए-इश्क़= To express love.
ख़ातिर= For the sake of.

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

!!! मेरा मन !!!

मेरी बर्बादियों के खेल ही खेला मेरा मन है,
कभी उधड़ा, कभी चिथड़ा, कभी मैला मेरा मन है !

मेरे मन की दीवारों की दरारें साफ़ दिखती हैं,
कभी ज़ाहिर, कभी बातिन, कभी धुंधला मेरा मन है !

कभी खंडर सा वीराँ है, कभी जंगल बयाबाँ है,
कभी जन्नतकभी मरघटकभी मेला मेरा मन है !

मुझे सुलझाने की ज़िद में, उलझ तू जाएगा ख़ुद ही,
कभी ज़िद्दी, कभी जंगली, कभी अक़्ला मेरा मन है !

बदलती सूरतें देखीं, बदलती सीरतें देखीं,
यक़ीन करता हूँ अब भी मैं, कहाँ बदला मेरा मन है !

तेरी बचकानी बातों पर मेरा दिल आ ही जाता है,
कभी नादाँ, कभी फ़ाज़िल, कभी कमला मेरा मन है !

नसीहत सबको देता हैअमल ख़ुद ही नहीं करता,
कभी जाहिल, कभी आलिम, कभी पगला मेरा मन है !

मुझे अल्फ़ाज़ होने की सज़ाएँ भी मिलेंगी न,
कभी मुंकिर, कभी काफ़िर, कभी क़िबला मेरा मन है !

||| फ़राज़ |||

बर्बादी= Destruction, Loss.
उधड़ा= Flayed, Peeled.
चिथड़ा= Rag.
मैला= Dirty
दरारें= Cracks
ज़ाहिर= Open, Evident.
बातिन= Internal.
धुंधला = Blur, Hazy
खंडर= Ruin
वीराँ= Deserted, Desolated
बयाबान= Wilderness
मरघट= Crematory 
जन्नत= Paradise, Heaven
मेला= Fair, Festival
ज़िद्दी= Stubborn, Adamant.
जंगली= Bestial, Savage.
अक़्ला= Wise, Intelligent.
सूरतें= Faces.
सीरतें= Character, Nature, Qualities.
यक़ीन= Trust, Confidence.
बचकानी= Childish
नादाँ= Innocent, Foolish
फ़ाज़िल= Scholar, Proficient.
कमला= Crazy/Mad in love.
नसीहत= Advice
अमल= Act.
जाहिल= Illiterate, Uncivilized.
आलिम= Learned, Scholar, Intelligent
तौबा= Penitence, Repentance
रिन्दाना= Drunk
मुंकिर= Rejecting, Atheist
काफ़िर= Infidel
क़िबला=  The direction of the Kaaba (the sacred building at Mecca), to which Muslims turn at prayer.


शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

!!! तू बता !!!

मौका बराबरी का लाती है हर मुसीबत,
मुझको न मुश्किलों के आकार तू बता !

मिट्टी से ही बना हूँ, मिट्टी में जा मिलूँगा,

अपनी भी शख़्सियत के अज़्कार तू बता !

सुनते हैं कहकहे थे तेरी अमीरियों में,

है कौन मुफ़्लिसी में ग़मख़्वार तू बता !

हर शाम महफ़िलें थीं तेरी हवेलियों में,

सूने पड़े हैं क्यूँ दर-ओ-दीवार तू बता !

मौजूदगी से तेरी रौशन थी जिनकी महफ़िल,

क्यूँ हो गए वो इतने अग़्यार तू बता !

कर लूँगा तुझको शामिल, मैं अपनी दास्तां में,
मुझको तेरा मुकम्मल किरदार तो बता !

तेरे पड़ोस में कल, भूखा था कोई सोया,

क्या जाना तूने पढ़के अख़बार तू बता !

दरिया जो इश्क़ का है, डूबे ही तो मज़ा है,

जा कर के क्या मिलेगा उस पार तू बता !

तरकीब है लगता तू रोज़ ज़िन्दगी की,

'फ़राज़' मौत को है कितना तैयार तू बता !

||| फ़राज़ |||



मौका (mauka) = Chance, Oppertunity
मुसीबत (musibat) = Problem, Trouble, Adversity.
आकार (aakar) = Size, Form.

शख़्सियत (shakhsiyat) = Personality, Individuality.

अज़्कार (azkar) = Talk About.
कहकहे (Kahkahe) = Guffaws, A Loud Laughter
अमीरी (Ameeri) = Richness, Wealth
मुफ़्लिसी (Muflisi) = Poverty
ग़मख़्वार (ghamkhwar) = Consoler, Sampethizer, Friend.
महफ़िल (Mahfil) = Gathering, Party
हवेली (Haveli) = Mansion.
दर-ओ-दीवार (Dar-O-Diwar) = Doors And Walls, Every Nook And Corner,
मौजूदगी (maujoodgi)= Presence
रौशन (roshan) = Illuminated, Bright.

अग़्यार (agyaar) = Strangers, Opponents

शामिल (shamil) = Comprise, Include
दास्तां (dastan) = Story, Tale.
मुकम्मल (mukammal) = Complete, Perfect.
किरदार (kirdar) = Character, Conduct
दरिया (dariya)= River
इश्क़= Love
तरकीब= Trick, Method.
रोज़= Everyday

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

!!! शिकायत !!!

अहद तो रूठने का था मगर मैं रूठा न रह सका,
जाने तुझे शिकायत ज़्यादा थी या मोहब्बत ज़्यादा !

||| फ़राज़ |||

अहद= Promise

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

!!! बराह-ए-रास्त !!!

बराह-ए-रास्त की कोई  नई तद्बीर लेकर आ !
नया है ख़्वाब तो कोई नई ताबीर लेकर आ,

बदलते वक़्त को दरकार हैं बदले हुए तेवर,
नया ग़ालिब, नया ख़ुसरो, नया तू मीर लेकर आ !

ज़ख़्म गुजरात के दंगों के मैं बेशक़ भुला दूंगा,
जो  है दुश्मन के ब्ज़े में, तू वो कश्मीर लेकर आ !

तेरे खंजर के हर एक पैंतरे का इल्म है मुझको,
मुझे गर क़त्ल करना है, तो तू शमशीर लेकर आ !

बहुत रुसवा मुसलमां है ख़ुदारा इस ज़माने में,
जो पैग़म्बर नहीं मुम्किन, तो कोई पीर लेकर आ !

ये दौर-ए-नाफ़्सा-नाफ़्सी है, किसे सरदार हम मानें
ख़ुदा इस दौर में भी हज़रत-ए-शब्बीर लेकर आ !

मुझे भी कर्बलावालों के जैसी मौत हासिल हो,
बुलंद आवाज़ में तू नारा-ए-तकबीर लेकर आ !

करेगा ख़ुद को जब हासिल, तभी हो पाएगा कामिल,
'फ़राज़' अपने जुनूँ की तू नई तफ़सीर लेकर आ !

|||फ़राज़|||


बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
ख़ातिर= for the sake of.
तद्बीर= Advice, Solution, Arrangement, Order.
ख़्वाब= Dream
ताबीर= Interpretation.
दरकार= Required.
तेवर= Attitude.
ग़ालिब= Mirza Ghalib, born Mirza Asadullah Baig Khan, was a prominent Urdu and Persian-language poet during the last years of the Mughal Empire. He used his pen-names of Ghalib and Asad.
ख़ुसरो= Ab'ul Hasan Yamīn ud-Dīn Khusrau, better known as Amīr Khusrow Dehlavī, was a Sufi musician, poet and scholar from the Indian subcontinent. He was an iconic figure in the cultural history of the Indian subcontinent.
मीर= 'Meer Muhammad Taqi Meer ', whose takhallus was Mir, was the leading Urdu poet of the 18th century, and one of the pioneers who gave shape to the Urdu language itself.
बेशक़= Doubtless
क़ब्ज़ा= Possession
रुसवा= Dishonored, Despondent.
मुसलमां= The Muslims
ख़ुदारा=  God.
ज़माना= Era, Time, Age.
पैग़म्बर= Prophet
मुम्किन= Possible, Practical
पीर= Saint, Mystic.
दौर-ए-नाफ़्सा-नाफ़्सी= Era/ Time of selfishness.
सरदार= Chief, Leader
दौर= Age, Era.
हज़रत-ए-शब्बीर=  Al-Ḥusayn ibn Ali ibn Abi Talib ( Hazrat Imam Hussain (A.S.)), was a grandson of the Islamic Nabi Muhammad (S.A.W.), and son of Ali ibn Abi Talib (Hazrat Ali A.S.). In order to preserve The Islam, he achieved martyrdom in a holy war against the evil Yazid and his army.
कर्बलावाले= the people who fought along with Hazrat Imam Hussain (A.S.) against the Yazid Army and achieved martyrdom for the prevention of Islam.
बुलंद= Raised, Loud.
नारा-ए-तकबीर= Shout of 'God is great'
खंजर= Dagger, Knife.
पैंतरे= Stratagems, Tricks.
इल्म= Knowledge, Information.
गर= If.
क़त्ल= Murder
शमशीर= Sword
कामिल= Perfect, complete
जुनूँ= Passion, Obsession, Frenzy, Madness,
तफ़सीर= Explanation, Commentary

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

!!! पीरी !!!

नहीं रहता है जिस्मों पर सदा मौसम जवानी का,
मगर दिल पर तो पीरी का कभी मौसम नहीं आता !!!

||| फ़राज़ |||


सदा = Forever
पीरी = old age, infirmity, exhaustion, weakness

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

!!! तजरबे !!!

तू क्या बतलायेगा मुझको क़द्र दिन के उजालों की,
कि मैंने स्याहियों के घर में भी रह कर के देखा है !

मेरी तालीम की क़ीमत बख़ूबी जानता हूँ मैं,
कि मैंने जाहिलों के घर में भी रह कर के देखा है !

बहुत ही मुख़्तसर सामाँ ज़रूरी ज़िन्दगी को है,
कि मैंने जोगियों के घर में भी रह कर के देखा है !

तू मेरे क़त्ल की कोई नई तरकीब लेकर आ,
कि मैंने क़ातिलों के घर में भी रह कर के देखा है !

हुनर यूँही नहीं कामिल मेरा तूफ़ाँ से लड़ने का,
कि मैंने आँधियों के घर में भी रह कर के देखा है !

मुझे मिसमार करना है तो लेकर आ क़यामत तू,
कि मैंने ज़लज़लों के घर में भी रह कर के देखा है !

कि मुझको है तजरबा आंसुओं के सारे रंगों का,
कि मैंने नादिमों के घर में भी रह कर के देखा है !

ग़लत इलज़ाम की अक्सर सज़ा लोगों को मिलती है,
कि मैंने मुजरिमों के घर में भी रह कर के देखा है !

मुसल्ले की जगह मेरे लिए वो पाक रखते हैं,
कि मैंने काफ़िरों के घर में भी रह कर के देखा है !

सबक़ फ़राज़से ले लो, कि कर लो इश्क़ से तौबा,
कि मैंने मजनुओं के घर में भी रह कर के देखा है !

||| फ़राज़ |||

क़द्र= Value
स्याहियां= Blackness
मुख़्तसर= Brief, little.
सामाँ= Provisions, Goods, Luggage.
ज़रूरी= Essential, Requisite.
जोगी= Hermit, Ascetic.
क़त्ल= Murder
तरकीब= Trick
क़ातिल= Murderer
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
कामिल= Perfect, Complete
तूफ़ाँ=  Tempest, storm
मालूम= Know
तालीम= Education.
बख़ूबी= Completely, Thoroughly
जाहिल= Illiterate, Uncivilised.
ग़लत= Wrong, Erroneous.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
सज़ा= Punishment
मुजरिम= Criminal, Offender, Sinner.
मुसल्ला= The prayer-carpet.
पाक= Pure, Clean, Holy.
काफ़िर= Infidel
तजरबा= Experience.
नादिम= Ashamed, Sorry, Penitent, Repent.
मिसमार= Demolished, Raised.
क़यामत= Apocalypse, Doomsday
ज़लज़ला= Earthquake
सबक़= Lesson.
तौबा= Vowing to sin no more, Penitence.



गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

तलाश !!!

जाने क्या तलाश है जो ख़त्म नहीं होती,
यूँ तो रोज़ मिलता हूँ ज़िन्दगी से मैं !!!


||| फ़राज़ |||

रविवार, 28 जनवरी 2018

अहद-ओ-अना !!!

ज़ख़्म देने वाला तो वही पुराना है,
फ़िर भी लगता है कि चोट नई हो जैसे !

उसके अश्कों में यूँ बहे मेरे अहद-ओ-अना, 
नाव काग़ज़ की सैलाब में बही हो जैसे !

जब नींद से जागा तो आग़ोश तन्हा था,
तू रात भर ख़्वाबों में रही हो जैसे !

ख़ुद को बहलाता हूँ मैं एक ख़ुश-गुमानी से,
रास्ता अब भी मेरा तू देख रही हो जैसे !

कोई आहट, कोई एहसास, कोई जुम्बिश न हुई,
तू दबे पाँव मुझे छोड़ गई हो जैसे !

उसके क़दमों के निशाँ भी तो बाक़ी न रहे,
मुझको आने में बहुत देर हुई हो जैसे !

अब नहीं आती है होंठों पर पहले सी हंसी,
ज़िन्दगी में कोई तो कमी हो जैसे !

दम निकलता नहीं 'फ़राज़' न जाने क्यूँ तेरा,
दिल में कोई हसरत अधूरी सी हो जैसे !

||| फ़राज़ |||

ज़ख़्म = Wound
अश्क = Taers
अहद= Promise
अना= Ego, Self
काग़ज़= Paper
सैलाब= Flood, Deluge.
आग़ोश= Embrace.
तन्हा= Hollow, Alone, Empty.
ख़ुश-गुमानी= Misconception.
एहसास= Feeling, Perception.
जुम्बिश= Vibration, Jerk, Motion.
दबे पाँव= Tip-toe, Walk stealthily.
क़दमों के निशाँ= Footprints.
दम= Breath, Life.
हसरत= Unfulfilled desire.

शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

मोमिन !!!

मुझे मस्जिद में जाना है, तुझे मंदर में जाना है,
ख़ुदा ही एक है जिसको, सभी के घर में जाना है !

तेरी हस्ती ही क्या है जो, तू ये बतलायेगा रब को,
ख़ुदा को किस इमारत में ख़ुदा का घर बनाना है !

बड़ा ही फ़ख़्र  है ग़ाफ़िल तुझे अपनी सख़ावत पर,
तू क्या दे पायेगा उस रब को, कि उसका तो ज़माना है !

लगा ले सारी तरकीबें, ज़माने को कमाने की,
यही एक सच है इंसां का, कि ख़ाली हाथ जाना है !

मुझे है जानना मक़सद, मेरे दुनिया में आने का,
तू कर ख़्वाहिश ज़माने की, मुझे तो ख़ुद को पाना है !

इसी मिट्टी से पैदा हैं सभी मोमिन सभी काफ़िर,
यही तामीर-ए-मस्जिद है, यही बुत का भी ख़ाना है !

इसी मिट्टी से तू पैदा, इसी मिट्टी से मैं पैदा,
फ़र्क़ क्यूँ है अक़ीदे में, बहुत मुश्किल बताना है !

नज़र तुझको भी एक दिन वो, मलक-उल-मौत आयेंगे,
कि हर ज़िन्दा बशर के रु-ब-रु ये पेश आना है !

शुक्र इतना भी क्या कम है की मैं ज़िन्दा सलामत हूँ,
कब्र का हाल तो 'फ़राज़', महज़ मुर्दों ने जाना है !

||| फ़राज़ |||

मस्जिद= Mosque.
मंदर= Temple.
हस्ती= Existence
रब= God.
ख़ुदा= God.
इमारत= Building
फ़ख़्र= Pride, A thing to be proud of boasting.
ग़ाफ़िल= Negligent, Neglectful, Oblivious.
सख़ावत= Generosity.
ज़माना= Time, World.
तरकीबें= Tricks
इंसां= Human, man, mankind
मक़सद= Intention, purpose, object.
ख़्वाहिश= Wish, Will.
मोमिन= Believer (in Islam), Pious.
काफ़िर= Infidel, Impious.
तामीर-ए-मस्जिद= Construction of Mosque
बुत= Idol.
ख़ाना= House
फ़र्क़=Difference.
अक़ीदा= Fundamental doctrine of Belief. Tenet.
मलक-उल-मौत= Say, "The Angel Of Death Will Take You Who Has Been Entrusted With You. Then To Your Lord, You Will Be Returned." (Quran Surah 32:11)
ज़िन्दा= Alive, Living.
बशर= Man, Human being.
रु-ब-रु= Face to face, in person, In front of.
पेश= Happen.
शुक्र= Thank
सलामत= Safe. 
कब्र= Grave.
महज़= Merely, only.
मुर्दा= Dead.