तू क्या बतलायेगा मुझको क़द्र दिन के उजालों की,
कि मैंने स्याहियों के घर में भी रह कर के देखा है !
मेरी तालीम की क़ीमत बख़ूबी जानता हूँ मैं,
कि मैंने जाहिलों के घर में भी रह कर के देखा है !
बहुत ही मुख़्तसर सामाँ ज़रूरी ज़िन्दगी को है,
कि मैंने जोगियों के घर में भी रह कर के देखा है !
तू मेरे क़त्ल की कोई नई तरकीब लेकर आ,
कि मैंने क़ातिलों के घर में भी रह कर के देखा है !
हुनर यूँही नहीं कामिल मेरा तूफ़ाँ से लड़ने का,
कि मैंने आँधियों के घर में भी रह कर के देखा है !
मुझे मिसमार करना है तो लेकर आ क़यामत तू,
कि मैंने ज़लज़लों के घर में भी रह कर के देखा है !
कि मुझको है तजरबा आंसुओं के सारे रंगों का,
कि मैंने नादिमों के घर में भी रह कर के देखा है !
ग़लत इलज़ाम की अक्सर सज़ा लोगों को मिलती है,
कि मैंने मुजरिमों के घर में भी रह कर के देखा है !
मुसल्ले की जगह मेरे लिए वो पाक रखते हैं,
कि मैंने काफ़िरों के घर में भी रह कर के देखा है !
सबक़ ‘फ़राज़’ से ले लो, कि कर लो इश्क़ से तौबा,
कि मैंने मजनुओं के घर में भी रह कर के देखा है !
||| फ़राज़ |||
क़द्र= Value
स्याहियां= Blackness
मुख़्तसर= Brief, little.
सामाँ= Provisions, Goods, Luggage.
ज़रूरी= Essential, Requisite.
जोगी= Hermit, Ascetic.
क़त्ल= Murder
तरकीब= Trick
क़ातिल= Murderer
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
कामिल= Perfect, Complete
तूफ़ाँ= Tempest, storm
मालूम= Know
तालीम= Education.
बख़ूबी= Completely, Thoroughly
जाहिल= Illiterate, Uncivilised.
ग़लत= Wrong, Erroneous.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
सज़ा= Punishment
मुजरिम= Criminal, Offender, Sinner.
मुसल्ला= The prayer-carpet.
पाक= Pure, Clean, Holy.
काफ़िर= Infidel
तजरबा= Experience.
नादिम= Ashamed, Sorry, Penitent, Repent.
मिसमार= Demolished, Raised.
क़यामत= Apocalypse, Doomsday
ज़लज़ला= Earthquake
सबक़= Lesson.
तौबा= Vowing to sin no more, Penitence.