अहद तो रूठने का था मगर मैं रूठा न रह सका,
जाने तुझे शिकायत ज़्यादा थी या मोहब्बत ज़्यादा !
||| फ़राज़ |||
अहद= Promise
जाने तुझे शिकायत ज़्यादा थी या मोहब्बत ज़्यादा !
||| फ़राज़ |||
अहद= Promise
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l