बुधवार, 28 सितंबर 2016

और फ़िर तन्हाई...

रात है, चाँद है, और फ़िर तन्हाई,
रात चराग़ों में फ़िर जली हो जैसे !
ये तेरी आहट, कि बढ़ गयी धड़कन,
ये तेरा साया, कि तू मिली हो जैसे !

दिल में तक़लीफ़ सी जगी हो जैसे,
याद फ़िर सीने में चुभी हो जैसे,
ये ख़याल फ़िर तेरे न होने का,
चोट कोई फ़िर छिल गई हो जैसे !

इतनी क़ुर्बत कि हर पल की ख़बर रहती थी,
इतनी दूरी कि कोई दुश्मनी हो गई हो जैसे,
बात करती है तो बस ज़ख्म देती है,
देखती यूँ है कि कोई अजनबी हो जैसे !

है क्या दीवानगी, ये तमन्ना धुंधली सी,
उसके आने की कोई आस बची हो जैसे !
वक़्त-ए-रुख़सत तूने मुड़कर न देखा पीछे...
ज़िन्दगी साथ मेरा छोड़ चली हो जैसे...

|||फराज़|||

बुधवार, 21 सितंबर 2016

अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..



आज मुझे अपनी गहराइयों में छुप के रह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी मैं बिखरा हूँ, कुछ वक़्त में सिमट जाऊँगा..
अभी सोया हूँ, जब जागूँगा तो निखर जाऊँगा..
मेरे हालात से तुम न परेशान न होना..
मैं हूँ दरिया, समंदर नहीं, जो ठहर जाऊँगा..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी बाक़ी हैं हवास, कोई बात न मैं समझूंगा..
एक पैमाना और कर दूँ ख़ाली, तो कुछ समझूंगा..
अभी ज़िन्दगी के कुछ घूँट भी हैं पीना बाक़ी..
जो कुछ बूँदें ही मिल जाएँ तो ग़नीमत समझूंगा..

मुझसे ख़्वाबों में भी ना कोई रिश्ता रखना..
इतना है कहना, इतना ही बस कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...

आज भी याद है जब तुमने कुछ कहा भी न था..
तुम ही आँखों में, ख़्वाबों में, मेरी ज़िन्दगी में थे..
आज भी याद हैं ठिकाने तुझसे मिलने के..
आज भी कानों में तेरी सी सदा आती है..
ये, और कुछ और बातें, जो अधूरी रह गयीं..
आज फिर ये बातें मुझे खुद से कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..

आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...

मंगलवार, 20 सितंबर 2016



क्या मेरे ख़याल पर आज भी तू ठहरा होगा ?
क्या मेरे नाम को फ़िर चुपके से पुकारा होगा ?
कभी फ़ुर्सत में मेरी यादों में गुम हो के,
मेरे अहसास को आग़ोश में उतरा होगा?

क्या फिर कभी माथे पे लटकती लट को
उतने ही करीने से फिर संवारा होगा ?
कभी यूँही जो ढूंढोगे गुज़रे सालों में,
मिल जायगा वो लम्हा जो साथ गुज़ारा होगा..

इसे वक़्त का तक़ाज़ा कहो या मेरी लाचारगी,
है क़ुबूल हर फ़ैसला जो भी तुम्हारा होगा..
अब न कोई आंसू न दर्द रहा बाक़ी,
पर क्या होगा, जो मुझसे सवाल तुम्हारा होगा..

यादों की दराज़ों में महफूज़ वो गुज़रे लम्हें,
सीने में क़ैद कोई मलाल जो तुम्हारा होगा..
कफ़न में लिपट कर न जाने कितनी आरज़ुएं,
सो जाएंगी ज़ेर-ए-कब्र जब विसाल हमारा होगा !!!

सोमवार, 19 सितंबर 2016

हर रात ख़्वाबों में



हर रात ख़्वाबों में आते हो ख़ामोशी के साथ,
कुछ बिसरी सी यादें लिए, सरगोशी के साथ,
न दो दस्तक ख़्वाबों के किवाड़ों पर,
आज सोया हूँ आग़ोश में तेरी परछाईं के साथ..

तेरे वादों का दिल पे कुछ तो भरम बाक़ी है,
शायद बाक़ी है धड़कन, पर कुछ कम बाक़ी है,
न हसरत, न दुआ, न कोई इल्तिजा बाक़ी,
बस मैं हूँ बाक़ी मेरी तन्हाई के साथ..

हर करवट पे तेरा झूठा गुमान बाक़ी है,
कोई रिश्ता नहीं बाक़ी, बस पहचान बाक़ी है,
मेरी चाँद बेख़बर है मेरी अमावास रातों से,
अब तन्हा है सफ़र मेरा आवारगी के साथ!!!

रविवार, 18 सितंबर 2016

अहद-ए-वफ़ा !!!


कब तलक दर्द मैं बेवजह लिखूं,
सोचता हूँ आज तेरा अहद-ए-वफ़ा लिखूं !
लिखूं मोहब्बत में डूबी तेरी बातें,
कि आज तेरा चेहरा ख़फ़ा-ख़फ़ा लिखूं !

लगता है चाँद तेरी बिंदिया जैसा,
सोचता हूँ कि चाँद को तेरा गहना लिखूं !
चलो लिखता हूँ तेरा चेहरा चाँद के जैसा,
फ़िर सोचता हूँ कि अब चाँद को क्या लिखूं ?

रखता हूँ आज भी तेरे ख़त मैं क़रीने से,
तेरी हर याद को मैं अपना ज़ाना लिखूं !
मेरी आवाज़ पर जो दौड़ा चला आता था,
मैं कैसे उसका लौटकर न आना लिखूं !

वक़्त की सिफ़त है बदलते रहना,
चल वक़्त की तरह तेरा बदलना लिखूं !
लिख दूँ तुझसे पहले-पहल मिलना,
या मिलकर 'फ़राज़' से तेरा बिछड़ना लिखूं!!!

||| फ़राज़ |||

अहद-ए-वफ़ा = promise of constancy
क़रीने= decorations
ज़ाना= Treasure
पहले-पहल= Initially, Beginning

शनिवार, 10 सितंबर 2016

A tear



Is it a tear for the kiss we had?
Or a tear for the love that left,
Is it a tear for the love at first sight?
Or a tear for brutal heartbreak.
Is it a tear for I thought you are the one?
Or a tear for my side there is none.
We both know it should not happen this way,
The streets we walk along, never trace us together again,
I wish those secret rendezvous,
Under the stars, murmuring thought night,
Would still be waiting for us to return.
I understand all I sought for
Is now shattered to pieces like glass.
And so now I have to take it in my face,
And will have to walk apart.
I understand how much I want you to say,
But now that you won’t come back,
I’ll have to walk away.

Time is the real Master


Once upon a time, 
there was a little birdy
Chirping along with family, 
and peeping from his nest.

One eve the birdy saw another
on the next branch.
Both fell in love at the first sight,
Hereafter,
they always chirped together.

Folk of the same wind 
flew together to different skies,
Far away from their own nests, 
they were setting up one on their own.
Life was dancing, so they were.
Sharing weal and woes, arm in arm.

Then wind changes the intensity,
and so the fate.
The calm breeze turned into a storm 
And shattered nest within an instance.
Brutally, and no reason why?

All the chirping hushed at once.
And lovebirds got separated.
Life turned an elegy,
An endless pain either.

Where are you my little birdy
I can’t fly when you are not around
This is what I feel without you
Alas! I have words but no sound.




एक उम्र गुज़र गयी इंतज़ार में
हूँ दर-ब-दर कि ठिकाना नहीं मिलता..

फ़क़त दुनिया ही नहीं अजनबी लगती
आईने में भी अब मेरा चेहरा नहीं मिलता..

मक़तूल हूँ मैं, तेरा राज़दार भी हूँ
जुर्म का तेरे और कोई गवाह नहीं मिलता..

तुम लौटना भी चाहो तो हैरत होगी
कोई बेवफ़ा कभी बेवजह नहीं मिलता..

लोग कहते थे की मोहब्बत अनमोल है
मैं जानता हूँ की दौलत से क्या नहीं मिलता..

तूने मंदिर में ढूंढा, मैंने मस्जिद में तलाशा
जो अन्दर है, बाहर वो ख़ुदा नहीं मिलता..