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रविवार, 13 अगस्त 2017

वजह!!!

यूँ तो रोने को ग़म हज़ार हैं ज़माने में,
हंसने के लिए बस एक वजह बहुत है!

आ जाओ कि बसा लें हम एक दुनिया,
मेरे दिल में ख़ाली सी जगह बहुत है!

दिल है कि तेरी ही इबादत करता है,
यूँ तो इस ज़माने में ख़ुदा बहुत हैं!

लाख रंजिशें रख लें मुझसे दुनिया वाले,
दोस्त के दिल की एक दुआ बहुत है!

तुझसे जीत कर मैं कुछ न पाऊंगा,
तुझसे हार जाने में नफ़ा बहुत है!

जाने क्यूँ बस दिल को सज़ा मिलती है,
यूँ तो निगाहों के भी तो गुनाह बहुत है!

क़फ़स उन निगाहों की पुरमसर्रत हैं,
हसीन ये क़ैद की सज़ा बहुत है!

पलकें उठाने से वो घबराता है 'फ़राज़',
सुना है उसकी आँखों में हया बहुत है!

|||फ़राज़|||

क़फ़स= Prison, पुरमसर्रत= Full of happiness

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

ख़्वाब

नींद से था जागा मगर आँख लगी हो जैसे,
रात फिर ख़्वाब में मुझको तू मिली हो जैसे !

ख़्वाब जो टूट गया उसकी तासीर ही कुछ ऐसी थी,
तेरे आग़ोश में कोई रात कटी हो जैसे !

ख़्वाब के बोझ से पलकें मेरी यूँ बोझिल हैं,
नींद फ़िर तेरा पता पूछ रही हो जैसे !

मैंने दामन तेरा कुछ सोच के फ़िर थाम लिया
कोई रंजिश कभी तुझसे न रही हो जैसे !

मेरे हाथों में कुछ देर तलक तेरा हाथ रहा,
ख़्वाब में ख़्वाब को ताबीर मिली हो जैसे !

मैंने माना ये हक़ीकत नहीं, महज़ ख्वाब ही था,
एक लम्हे को तेरी आहट साथ रही हो जैसे !

बारहा ख़्वाब था, तो टूट ही गया,
मुझसे तू ख़्वाब में भी रूठ गयी हो जैसे !