यूँ तो रोने को ग़म हज़ार हैं
ज़माने में,
हंसने के लिए बस एक वजह
बहुत है!
आ जाओ कि बसा लें हम एक
दुनिया,
मेरे दिल में ख़ाली सी जगह
बहुत है!
दिल है कि तेरी ही
इबादत करता है,
यूँ तो इस ज़माने में ख़ुदा
बहुत हैं!
लाख रंजिशें रख लें मुझसे
दुनिया वाले,
दोस्त के दिल की एक दुआ
बहुत है!
तुझसे जीत कर मैं कुछ न
पाऊंगा,
तुझसे हार जाने में नफ़ा
बहुत है!
जाने क्यूँ बस दिल को सज़ा
मिलती है,
यूँ तो निगाहों के भी तो
गुनाह बहुत है!
क़फ़स उन निगाहों की
पुरमसर्रत हैं,
हसीन ये क़ैद की सज़ा बहुत है!
पलकें उठाने से वो घबराता
है 'फ़राज़',
सुना है उसकी आँखों में हया
बहुत है!|||फ़राज़|||
क़फ़स= Prison, पुरमसर्रत= Full of happiness