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गुरुवार, 16 मई 2019

जो इश्क़ करे


है कौन कि जो आबाद हुआ,
जो इश्क़ करेबर्बाद हुआ !

है वस्ल ख़ुशी ऐसी जिसमें,
जो शाद हुआनाशाद हुआ !

जो पार हुआगुमनाम रहा,
जो डूब गयाफ़रहाद हुआ !

हम तेरे जैसे लगते हैं,
तू इतना हमको याद हुआ !

दिल काँच के जैसा
 नाज़ुक था,
जब टूट गयाफ़ौलाद हुआ !

इन्सान थे उतरे दुनिया में,
ये धर्म कहाँ ईजाद हुआ !

जिससे खायी हमने ठोकर
,
वो संग मेरी बुनियाद हुआ !

'अल्फ़ाज़ग़ज़ल का राज़ है ये,
महसूस कियाइरशाद हुआ !

||| अल्फ़ाज़ |||

आबाद = Inhabited, Prosperous, संपन्नखुशहाल
बर्बाद = Ruin, Destroy, नष्ट
वस्ल = Union Or Meeting (Typically Used In The Context Of A Meeting Of Lovers), मिलन,
शाद = Happy, Glad, प्रसन्नआनंदित
नाशाद = Unhappy, Joyless, दुखी
फ़रहाद = Hero Of The Famous Love-Story 'Shirin-Farhad', 
नाज़ुक = Delicate, Gracious, कोमल
फ़ौलाद = Steel, लोहा
धर्म = Religion
ईजाद = Invent
संग = Stone, पत्थर
बुनियाद = Foundation आधार
इरशाद = Means A Command Or An Order Given To Someone


सोमवार, 31 जुलाई 2017

बरबादियाँ !!!

हक़ीकत-ए-हस्ती अपनी
मैं तुझसे बयां करता हूँ,
हार जाता हूँ जब ख़ुद से
तो गुनाह करता हूँ मैं !

तू भी पाक दामन नहीं
ऐब तुझमे भी हैं बेशक़,
बारहा तेरी पर्देदारियों का 
एहतराम करता हूँ मैं !

मेरी लकीरों में थी आवारगी
तो तुझे इल्ज़ाम क्या दूँ,
खेल  लकीरों का ही था,
चल एतराफ़ करता हूँ मैं !

पूज कर उस पत्थर को
मैंने ही ख़ुदा कर डाला,
बरबादियों का कुछ यूँ
इन्तिज़ाम करता हूँ मैं !

शायद तू फ़िर से कभी
सब छोड़ के आ जाये,
शिक़ायतें, हसरतें, किस्से,
सब एहतिमाम रखता हूँ !

रेत के साथ मिट गए
तेरे क़दमों के सारे निशां, 
राह के पत्थरों से अब भी
दुआ सलाम करता हूँ मैं !!!

|||फ़राज़|||