अहसास
फ़िर एक दबा सा ढूंढ लिया,
दिल ने
दर्द का फ़िर पता ढूंढ लिया !
बेज़ार
हो चला था दिल सुकूनियत से,
दिल
आज़ारी का फ़िर मरहला ढूंढ लिया !
एक
उम्र तलक रहे हैं आवारगी के दिन,
थके
हुए क़दमों ने फ़िर आशियाँ ढूंढ लिया !
उससे
शिक़ायत क्या करूँ की ग़ैर है वो,
ख़ुद से
ही आज फ़िर गिला ढूंढ लिया !
अहसासों
को तलाश थी अल्फ़ाज़ों की,
फिर से
एक राज़ छुपा सा ढूंढ लिया !
सब
इल्ज़ाम मैंने अपने नाम कर लिए,
पर तू
न मिला, मैंने बेइन्तेहा ढूंढ लिया !
मेरे
तू ख़्वाबों में भी ख़्वाब हो गया,
रतजगों का मैंने सिलसिला ढूंढ लिया !
रतजगों का मैंने सिलसिला ढूंढ लिया !