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सोमवार, 27 अगस्त 2018

सावन

छू जाओ मेरे ज़ख्मों को मरहम की तरह,
बरस जाओ मुझपर घने सावन की तरह !

तेरे ख़याल में इतवार की सी फ़ुर्सत है,
तू पहली बारिश, तू घर के आंगन की तरह !

ये और बात है कि निगाह से दूर रहते हो,
दिल में सदा रहते हो धड़कन की तरह !

दुनिया से बे-फ़िक्र हो जाऊं मैं फ़िर से,
लौट आओ कभी मेरे बचपन की तरह !

रूह प्यासी है किसी सूखे हुए पत्ते की तरह,
कभी मुझपे ठहर जाओ शबनम की तरह !

छू जाओ मेरे ज़ख्मों को मरहम की तरह,
बरस जाओ मुझपर घने सावन की तरह !

||| फ़राज़ |||
















दोस्तों, इस बार आप लोगों की कोई भी एंट्री सेलेक्ट नहीं की जा रही है ! मुझे उम्मीद है की अगली बार आप लोग बेहतर एंट्रीज़ ले कर आयेंगे ! इस बार अल्फ़ाज़ की एक कोशिश पेश की जा रही है !

क्यूँ न खुद से ही मोहब्बत कर के देखें