कम-ओ-बेश न होगी जायदाद सबकी,
किसी भी क़ब्र में कभी उतर के देखिये !
अपने जिस्म-ओ-रंगत पे गुमां करने वाले,
किसी रोज़ क़ब्रिस्तान में जाकर के देखिये !
सुना है उन्हें कैफ़ है पर कतरने से,
पैर ज़रा उनके भी काट करके देखिये !
बर्बादी का सबब कोई अपना ही रहा होगा,
निशाँ ये अपनी पीठ पे खंजर के देखिये !
आईना भी नज़र से गिरा देगा 'फ़राज़',
कभी अपनी नज़र से गिर कर के देखिये !
बाईस-ए-इस्लाह रास्तों पे छोड़ आया
हूँ,
नक़्श-ए-क़दम इस शहर-बदर के देखिये !
|||फ़राज़||||
कम-ओ-बेश= More or less.
जायदाद= Property.
जिस्म-ओ-रंगत=Body and colour/form/condition.
गुमां= Proud
कैफ़= Happiness, joy, exhilaration.
पर= Wings.
निशाँ= Mar, Impression, A clue.
खंजर= Dagger, Clinker.
बाईस-ए-इस्लाह= Cause/reason/Motive of correction
नक़्श-ए-क़दम= Footprints, Footsteps.
शहर-बदर= Banishment, Exile.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें