देखते हैं सफ़र किस ठिकाने चले,
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
शुक्रवार, 9 सितंबर 2022
सफ़र...
शनिवार, 27 अगस्त 2022
अक्स...
शुक्रवार, 5 अगस्त 2022
इंसान
मुश्किल में न पड़ें हम,आसान ही रहें,
क्यूँ न कि आप और हम इंसान ही रहें!
संजीदगी से जीने को उम्र है पड़ी,
बच्चे हैं तो ज़रा से शैतान ही रहें!
आई हैं पेश ऐसी कड़वी हक़ीक़तें,
इम्कान या ख़ुदारा इम्कान ही रहें!
अल्लाह तू भले ही नादान हमको रख,
आधे-अधूरे सच से अन्जान ही रहें!
‘अल्फ़ाज़’ है ज़रूरी थोड़ा अधूरापन,
अरमान कुछ हमेशा अरमान ही रहें!
।।। अल्फ़ाज़ ।।।
संजीदगी = Seriousness, गंभीरता
शैतान = Naughty, शरारती
पेश = Happen, समक्ष
हक़ीक़त = Reality, वास्तविकता
इम्कान = Possibility, Probability, अंदेशा, शंका
या ख़ुदारा = O God
नादान = Innocent, Ignorant, अज्ञानी
अरमान = Desire, Longing, इच्छा, लालसा
मंगलवार, 28 जून 2022
अंजुमन
अंजुमन में हमारी वो मेहमान हैं,
आज हमको क़यामत का इम्कान है!
सबने अपनी मोहब्बत की बातें करीं,
और मेरा कहीं और पर ध्यान है!
आग फिर से वही दिल में मेरे लगे,
एक बुझता हुआ दिल में अरमान है!
क्यूँ न इंसान बनकर ही हम तुम मिलें,
दिल से बेहतर गवाही भला कौन है,
दिल से बेहतर भला कौन मीज़ान है!
दोस्तों की तरह भूल जाते नहीं,
दुश्मनों का बड़ा हमपे अहसान है!
वक़्त पड़ने से पहले वहम था हमें,
इस शहर में हमारी भी पहचान है!
नज़्म ‘अल्फ़ाज़’ की आज के दौर में,
बंद घर में खुला एक दालान है!
||| अल्फ़ाज़ |||
अंजुमन = सभा, Meeting, Assembly
अरमान = लालसा, इच्छा, Longing, Desire
इम्कान = संभावना, Possiblity, Probability
मीज़ान = तुला, तराज़ू, Weigher, Balence
दालान = बैठक, ओसारा, Open Hall, Vestibule
शनिवार, 4 जून 2022
क़ाइदा
आज़मा करके ख़ुद को ज़रा
देखिए,
इंतिहा की कोई इंतिहा देखिए!
ख़ुद को पहचान शायद नहीं
पाएँगे,
ख़ुद को बनके कोई दूसरा
देखिए!
मेरे दुश्मन भी सुनकर के
हैरान हैं,
मुझपे अपनों का वो तब्सिरा
देखिए!
आज मक़तूल को ही सुना
दी सज़ा,
मेरे हाकिम का ये फ़ैसला
देखिए!
फ़ाइदा जिससे हो, बस उसी से
मिलो,
इस शहर का नया क़ाइदा
देखिए!
ज़िन्दगी की हक़ीक़त समझ
जाएँगे,
आप पानी का एक बुलबुला
देखिए!
ये ग़ज़ल नहीं बचपना है मेरा,
मेरी धुन में मुझे खेलता
देखिए!
सबको अपनी तरह न समझ लीजिए,
थोड़ा ‘अल्फ़ाज़’ अच्छा-बुरा
देखिए!
||| अल्फ़ाज़ |||
इंतिहा = हद,
सीमा, Limit
तब्सिरा = टिपण्णी, Comment, Review
मक़तूल =
मृतक, Dead
फ़ाइदा =
लाभ, Profit
क़ाइदा =
ढंग, रीति, Manner
मंगलवार, 24 मई 2022
तरक़्क़ी
सहारे छोड़ कर सारे चलो ख़ुद
ही सँभलते हैं,
चलो हम आज अपने आप से बाहर
निकलते हैं!
मेरी बेरोज़गारी को तरक़्क़ी
मुँह चिढ़ाती है,
मिलों में काम अब इंसान का
रोबोट करते हैं!
बहुत नज़दीकियाँ दूरी की
वज्हा बन नहीं जाएँ,
मोहब्बत के अलावा भी चलो
कुछ काम करते हैं!
यही एहसान उनका कम है क्या
मेरी मसर्रत को,
मेरी ख़ातिर नहीं लेकिन गली
से तो गुज़रते हैं!
जहाँ फ़रमाइशें कहने से पहले
पूरी हो जाएँ,
उसी घर में ही अक्सर
दोस्तों बच्चे बिगड़ते हैं!
ये कैसा ज़िन्दगी का दौर है
जिसमे क़दम मेरे,
जहाँ से रोज़ चलते हैं, वहीं
आकर ठहरते हैं!
अलग तरहा से आए हैं मेरे
सूबे में अच्छे दिन,
जो पहले जुर्म करते थे, वो
अब इंसाफ़ करते हैं!
मदद की पेशकश करने से बस
‘अल्फ़ाज़’ डरते हैं,
वो मेरे हाल पर वैसे बड़ा
अफ़सोस करते हैं!
||| अल्फ़ाज़ |||
बेरोज़गारी = Unemployment
तरक़्क़ी = Progress,
Development, विकास
मिल =
Factory, कारख़ाना
नज़दीकी =
Closeness, Intimacy, Proximity, घनिष्ठ्ता, निकटता
वज्हा =
Cause, Reason, कारण
मसर्रत = Happiness, प्रसन्नता, ख़ुशी
ख़ातिर = For The Sake Of.
फ़रमाइश
= फ़रमाइश, Order For Goods, Will, Request, Pleasure, इच्छा
सूबा = Province, प्रदेश
जुर्म = Crime, अपराध
इंसाफ़ = Justice, न्याय
पेशकश = Offer,
प्रस्ताव
अफ़सोस = , विलाप,
दुःख/शोक प्रकट करना
मंगलवार, 17 मई 2022
ढूँढते रह गए!
चैन खोया हुआ ढूँढते रह गए,
उम्र भर बचपना ढूँढते रह
गए!
ज़िन्दगी हमको जी के चली भी
गयी,
ज़िन्दगी का पता ढूँढते रह
गए!
गाँव का घर हमे ढूँढता रह
गया,
हम शहर में मकाँ ढूँढते
रह गए!
दोस्तों ने कुछ ऐसे तजरबे
दिए,
दुश्मनों में वफ़ा ढूँढते
रह गए!
मौत आई तो हिकमत न कोई चली,
ज़िन्दगी भर दवा ढूँढते रह
गए!
उस तरफ़ कोई आग बाक़ी न थी,
जिस तरफ़ हम धुआँ ढूँढते रह
गए!
ठोकरों के सिवा और कुछ न
मिला,
पत्थरों में खुदा ढूँढते रह
गए!
तुमने इंसाँ को
इन्सान समझा नहीं,
इसलिए तुम ख़ुदा ढूँढते रह
गए!
मैं ख़यालों को ‘अल्फ़ाज़’
देता रहा,
लोग बस क़ाफ़िया ढूँढते
रह गए!
||| अल्फ़ाज़|||
मकाँ =House,
निवास
तजरबे = Experiences, अनुभव
वफ़ा = Fulfilment,
Fidelity, Faithful
हिकमत = Cure,
Medicare, उपचार
इंसाँ = Human Being, Mankind, मनुष्य
क़ाफ़िया=
Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya, तुकांत
बुधवार, 11 मई 2022
एक अधूरी मुलाक़ात
एक अधूरी मुलाक़ात की बात है,
अनकहे से सवालात की बात है!
फ़र्क पड़ता नहीं, जीत हो हार हो,
तुमने शह दी, यही मात की बात है!
ग़ैर के तो गिले यार से कर लिए,
किससे शिक़वा करें यार की बात है!
बात आई तो तुम बात से मुड़ गए,
तुम तो कहते थे कि बात की बात है!
वक़्त देते थे सब जब मेरा वक़्त था,
वक़्त देते नहीं, वक़्त की बात है!
जाने क्या सोच कर हम नहीं रो सके,
यूँ तो दिल टूटना रंज की बात है!
माना मेरे मुक़ाबिल हैं अपने मेरे,
कैसे पीछे हटूँ, फ़र्ज़ की बात है!
जब ग़ज़ल वो कहे ध्यान से तुम सुनो,
बात ‘अल्फ़ाज़’ की काम की बात है!
मुलाक़ात
=
Meeting, भेंट,
अनकहे
= Untold
सवालात = Questions, प्रश्न
फ़र्क = Difference, अन्तर
शह = Check
मात = Mate
गिले = Complaint, Lamentation,
शिक़वा = Complaint,
Lamentation,
रंज = Grief, दुःख
मुक़ाबिल = Against,
विरुद्ध
फ़र्ज़= Duty,
Responsibility, कर्तव्य
शनिवार, 7 मई 2022
मसाइल
ज़िन्दगी के मसाइल खड़े हो गए,
सोचते हैं क्यूँ आख़िर बड़े हो गए!
ज़िम्मेदारी ने जेबें मेरी काट लीं,
ख़्वाब बटुए से मेरे बड़े हो गए!
देखना अबकी मैं भी बदल जाऊँगा,
साल कितने यही सोचते हो गए!
हैं बुरे जो महज़ जुर्म करते रहे,
जो सियासत में आए, भले हो गए!
दोस्ती जब किताबों से मैंने करी,
मेरे घर में कई आईने हो गए!
बात सच्ची जो हमने कही एक दिन,
जितने अच्छे थे, उतने बुरे हो गए!
मोड़ आया तो ‘अल्फ़ाज़’ ऐसा हुआ,
अपने-अपने सभी रास्ते हो गए!
मसाइल = मस’अले, विषय, समस्याएँ, Problems Subjects, Matters
बटुए = Wallet, Purse
महज़ = Merely, Only, केवल, मात्र
जुर्म = अपराध, Crime
सियासत = राजनीति, Politics
शनिवार, 30 अप्रैल 2022
ईद
ईद का चाँद तो है फ़लक पे मगर,
तेरा दीदार न हो तो क्या ईद है!
जिसने रमज़ान भर हमसे पर्दा किया,
वो नुमूदार न हो तो क्या ईद है!
लाख रुपयों से बटुआ भरा हो मगर,
दोस्त और यार न हो तो क्या ईद है!
हीरे-मोती लगे हों लिबासों में पर,
साथ परिवार न हो तो क्या ईद है!
जिनको कपड़े मिले हों नए न कभी,
उनका सिंगार न हो तो क्या ईद है!
जश्न कितना भी सारे ज़माने में हो,
दिल में त्यौहार न हो तो क्या ईद है!
मेरे घर में भला ईद कैसे मने,
मुल्क में प्यार न हो तो क्या ईद है!
एक तकलीफ़ ‘अल्फ़ाज़’ ये भी तो है,
अपनी सरकार न हो तो क्या ईद है!
||| अल्फ़ाज़ |||
फ़लक
=
आसमान, Sky
नमूदार = प्रकट,
प्रत्यक्ष, Apparent, Visible,
लिबास
=
परिधान, पहनावा, Dress, Apparel
शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022
हाज़िरी
हंसती आँखों में ग़म की नमी आ गई,
लो बिछड़ने कि आख़िर घड़ी आ गयी!
यूँ तो कुछ भी मेरा वो नहीं ले गया,
उसके जाने से फिर भी कमी आ गयी!
जब भी संभले क़दम मस्जिदों में गए,
जब भी बहके तुम्हारी गली आ गयी!
उसको ख़ुश देख कर मैं सबर कर गया,
मेरे आड़े मेरी ही ख़ुशी आ गयी!
ज़िन्दगी दूर ज़्यादा तो मुझसे न थी,
मैंने आवाज़ दी, दौड़ती आ गई!
इससे बेहतर कोई सिलसिला न हुआ,
प्यार बन करके जब दोस्ती आ गई!
चूर तूफ़ाँ का सारा गुमाँ हो गया,
नाव साहिल पे जब काग़ज़ी आ गयी!
लफ़्ज़ ख़ुद ही कलम से निकलने लगे,
मुझपे ‘अल्फ़ाज़’ की हाज़िरी आ गई!
||| अल्फ़ाज़ |||
गुमाँ = भ्रम, Fancy,
Doubt, Suspicion
हाज़िरी
= उपस्थिति, Presence, Attendance
गुरुवार, 21 अप्रैल 2022
शायरी
मेरे दिल को जो ग़म की ख़बर हो गई,
शायरी किस क़दर बा-हुनर हो गई!
हम तेरे इश्क़ में मुब्तला यूँ हुए,
लोग कहते हैं हमको नज़र हो गई!
अर्श क्या, अब लबों तक पहुँचती
नहीं,
कितनी मेरी दुआ बे-असर हो गई!
रात कैसे कटेगी तुम्हारे बिना,
सोचते-सोचते फिर सहर हो गई!
रूप उसका हमें तेरे जैसा लगा,
आग पानी में जब तर-ब-तर हो गई!
इस ख़ुशी से कहीं मर ही जाएँ न हम,
आज उनको हमारी फ़िकर हो गई!
अब ज़रा में तबीयत बिगड़ जाती है,
लग रहा है हमारी उमर हो गई!
मेरे लहजे में तल्ख़ी ज़माने की थी,
मुझको ‘अल्फ़ाज़’ कैसे शकर हो गई!
||| अल्फ़ाज़ |||
बा-हुनर = प्रतिभावान,
Talented
अर्श =आसमान, Sky
मुब्तला = ग्रस्त,
Infest
सहर = प्रातःकाल, सवेरा,
Morning
तर-ब-तर = सराबोर,
Dranch
लहजा = भाव, Tone
तल्ख़ी = कड़वाहट,
Bitterness
शकर = मधुमेह,
Diabetes
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