एक अधूरी मुलाक़ात की बात है,
अनकहे से सवालात की बात है!
फ़र्क पड़ता नहीं, जीत हो हार हो,
तुमने शह दी, यही मात की बात है!
ग़ैर के तो गिले यार से कर लिए,
किससे शिक़वा करें यार की बात है!
बात आई तो तुम बात से मुड़ गए,
तुम तो कहते थे कि बात की बात है!
वक़्त देते थे सब जब मेरा वक़्त था,
वक़्त देते नहीं, वक़्त की बात है!
जाने क्या सोच कर हम नहीं रो सके,
यूँ तो दिल टूटना रंज की बात है!
माना मेरे मुक़ाबिल हैं अपने मेरे,
कैसे पीछे हटूँ, फ़र्ज़ की बात है!
जब ग़ज़ल वो कहे ध्यान से तुम सुनो,
बात ‘अल्फ़ाज़’ की काम की बात है!
मुलाक़ात
=
Meeting, भेंट,
अनकहे
= Untold
सवालात = Questions, प्रश्न
फ़र्क = Difference, अन्तर
शह = Check
मात = Mate
गिले = Complaint, Lamentation,
शिक़वा = Complaint,
Lamentation,
रंज = Grief, दुःख
मुक़ाबिल = Against,
विरुद्ध
फ़र्ज़= Duty,
Responsibility, कर्तव्य
Bahut behatrin 👌
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