पूरी जैसे कोई ज़िम्मेदारी करी,
उसने कुछ इस तरह सोग़वारी करी!
आते ही वो घड़ी देखने लग गए,
उसने कुछ इस तरहा ग़मग़ुसारी करी!
तेरी आँखों में लिखा नज़र आ गया,
तूने होंठों से जो राज़दारी करी!
बारहा दिल ठहर कर के सुनने लगा,
बात जब भी किसीने तुम्हारी करी!
मेरा ईमान कुछ सोच में पड़ गया,
उसने रिश्वत ज़रा सी जो भारी करी!
तुम भी लोगों की बातों में आ ही गए,
तुमने क्यूँ ठीक से जानकारी करी!
आप तो ख़ाक हमको समझने लगे,
हमने जो आपकी ख़ाकसारी करी!
हमको इस काम में फ़ाइदा न हुआ,
इश्क़ ‘अल्फ़ाज़’ क्या, एक बेगारी करी!
||| अल्फ़ाज़|||
सोग़वारी = शोक जाताना, Mourning
ग़मग़ुसारी = हमदर्दी,,Consolidation
राज़दारी = रहस्य
छुपाना,
बारहा = अक्सर, बार-बार, Many Times, Often
ख़ाक = धूल, Dust,
Ashes, Worthless, No Use
ख़ाकसारी = विनम्रता, विनति, Humility, Humbleness
फ़ाइदा = लाभ, Profit
बेगारी = अवैतनिक कार्य,
Forced Labour
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