शुक्रवार, 23 जून 2023

हुस्न और इश्क़

दिल का आँखों को ये मशवरा देखिए,

देखकर आपको और क्या देखिए!

 

रु-ब-रु एक सरापा पस-ओ-पेश है,

उनका चेहरा या उनकी क़बा देखिए!

 

अबकी बारिश में वो छत पे आए अगर,

बाग़ में मोर को नाचता देखिए!

 

शाम की सुर्ख़ियों का मज़ा और है,

उनको करके ज़रा सा ख़फ़ा देखिए!

 

देखते हैं वो ख़ुद को भला किस तरह,

आईने में उन्हें देखता देखिए!

 

ख़ुद से ही आपको इश्क़ हो जाएगा,

मेरी आँखों से मत आईना देखिए!

 

उन लबों पे जो इंकार है, झूठ है,

उनकी आँखों में उनकी रज़ा देखिए!

 

हुस्न और इश्क़ अल्फ़ाज़ मिलने को हैं,

इस क़यामत को होता हुआ देखिए!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

रु-ब-रु (Ru-Ba-Ru) = आमने-सामने, Face To Face, In Front Of

सरापा (Sarapa) = सर से पाँव तक, सम्पूर्ण, From Head To Foot, Entire

पस-ओ-पेश (Pas-O-Pesh) = उलझन, Indecision, Hesitation

क़बा (Qaba) = वस्त्र, वेशभूषा, परिधान, Attire, Dress

इंकार (Inkaar) = खण्डन, अस्वीकार करना, Refrain, Denial, Refusal

रज़ा (Raza) = मर्ज़ी, इच्छा, Desire, Will

 

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मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

असलियत

फ़िर्क़ों में तू बंटेगा, पंथों में तू फंसेगा,

जानेगा जब असलियत, ख़ुद पे ही तू हंसेगा!

 

भगवान की लड़ाई, भगवान वाले जानें,

इंसान की लड़ाई, इंसान ही लड़ेगा!

 

तेरा करम तेरे घर आएगा लौट करके,

तूने है कुछ जलाया, तेरा भी कुछ जलेगा!

 

कहता है हर शराबी मैं पूरे होश में हूँ,

वैसे तो हर शराबी सारा ही सच कहेगा!

 

ऐ राम के पुजारी, तू राम की तरह बन,

भगवान तब मिलेगा, इंसान जब बनेगा!

 

‘अल्फ़ाज़’ रौशनी का सीधा सा है तक़ाज़ा,

पुरनूर उतना होगा, जितना भी तू जलेगा!

||| अल्फ़ाज़ |||


फ़िरक़ा (Firqa) = Religious Sect, पंथ, साम्प्रदाय

तक़ाज़ा (Taqaaza) = Demand, माँग

पुरनूर (Purnoor) ­= Illuminated, Enlighted, तेजस्वी, रौशन

 

गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

स्याह उजाले...


सच के रस्ते चलने वाले पैरों में छाले मिलते हैं,

इस धूप की नगरी में हमको कुछ स्याह उजाले मिलते हैं!

 

एक वक़्त था जब घर की बेटी सारे गाँव की बेटी थी,

अब दूध-मुँही की इज़्ज़त को भी लूटने वाले मिलते हैं!

 

वो क्या जानें, हम भूखों को क्यूँ चाँद में रोटी दिखती है,

जिनको घर बैठे थाली में भर पेट निवाले मिलते हैं!

 

न टोपी, न ही लाल तिलक, न पगड़ी पहन के आया हूँ,

कुछ लोग मुझे क्यूँ बस्ती में तलवार निकाले मिलते हैं!

 

भगवान तो छोड़ो लोगों में इंसान भी अब कम मिलता है,

हाँ, वैसे तो इस नगरी में हर मोड़ शिवाले मिलते हैं!

 

कुछ काम पड़े तो मिलता है, बस काम की बातें करता है,

अब वो मिलता है ऐसे जैसे दुनिया वाले मिलते हैं!

 

कोहसार हों, दरिया-सागर हों, रस्ता आख़िर बन जाता है,

चाहे कुछ हो जाए लेकिन मिलने वाले मिलते हैं!

 

अब कौन भला हमको पढ़के हर रात सरहाने रखता है,

अब तो टूटी अलमारी में उर्दू के रिसाले मिलते हैं!

 

क्यूँ भीड़ यहाँ पर इतनी है, ‘अल्फ़ाज़’ पता कर आया है,

इन बाज़ारों में फ़ित्नों के तैयार मसाले मिलते हैं!

||| अल्फ़ाज़ |||


स्याह = काला, Black

कोहसार = पर्वतमाला, Range of Mountains

सिरहाना = Near Head

रिसाला = पत्रिका, Magazine

फ़ित्ना = बुराई, पाप, evil, sin

शनिवार, 1 अप्रैल 2023

बे-दख़्ल


जन्नत से बे-दख़ल* हूँ,

आदम की मैं नसल* हूँ!

 

शैताँ* ने बीज बोया,

मैं काटता फ़सल* हूँ!

 

करता हूँ मैं ख़ताएँ,

इंसान दरअसल* हूँ!

 

उलझा हूँ ख़ुद से जितना,

उतना हुआ मैं हल हूँ!

 

मैं ध्यान में रहूँगा,

माना कि मैं ख़लल* हूँ!

 

माहौल से मुझे क्या,

कीचड़ का मैं कमल हूँ!

 

इल्ज़ाम मैं किये दूँ,

अपने किये का फल हूँ!

 

हर दिल का आईना हूँ,

‘अल्फ़ाज़’ की ग़ज़ल हूँ!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

बेदख़ल (बे-दख़्ल)  =  निर्वासित, Exiled

नसल (नस्ल) = वंशज, Lineage

शैताँ = शैतान, दुष्ट, Satan

फ़सल (फ़स्ल) = उपज, खेती, Crop, Harvest

दरअसल (दर-अस्ल) = वस्तुतः, वास्तव में, Actually

ख़लल = बाधा, Interruption

माहौल = परिवेश, परिस्थिति, Surroundings, Environment. 

गुरुवार, 23 मार्च 2023

इश्क़


जिसको जितना मिला, उतना मिस्कीन है,

अपने ग़म में ज़माना ही ग़मगीन है!

 

दोगे जो भी इसे, तुमको लौटाएगा,

इश्क़ इज़्ज़त भी है, इश्क़ तौहीन है!

 

जिसको जैसे मिले, उसको वैसा करे,

इश्क़ रहमान है, इश्क़ फ़ित्तीन है!

 

एक के साथ दूजा चला आएगा,

इश्क़ तक़लीफ़ है, इश्क़ तस्कीन है!

 

बात तेरी नहीं, तू परेशाँ न हो,

दिल तो बस आदतन यूँही ग़मगीन है!

 

याद मीठी है लेकिन है क्या माजरा,

आँख का पानी जाने क्यूँ नमकीन है!

 

मामला ये है कि याद वो आ गया,

मामला आज ज़्यादा ही संगीन है!

 

जानते हैं कि अल्लाह कोई और है,

आशिक़ों के लिए इश्क़ ही दीन है!

 

आप जो भी कहें फ़र्ज़ ‘अल्फ़ाज़’ पर,

आप जो भी कहें उसपे आमीन है!

||| अल्फ़ाज़ |||


मिस्कीन = Poor, निर्धन, ग़रीब

ग़मगीन = Depressed, दुखी

तौहीन = Insult, अपमान

परेशाँ = Distressed, Bothered, चिंतित

रहमान = Merciful, दयालु

फ़ित्तीन = Mischievous, Sinner, बुराई डालने वाला, पापी

तस्कीन = Ease, Comfort,  चैन, सुख

संगीन = Tough, Serious, असाधारण, कठिन

माजरा = Happening, Narration, मामला, विषय

दीन = Religion, धर्म

फ़र्ज़ = Duty, कर्तव्य

गुरुवार, 10 नवंबर 2022

एहसास

सीने से तो वो लगा थादिल से लगा न था,

कुछ इस तरह मिला वो जैसे मिला न था!

 

किरदार को मैं उसके कैसे बुरा कहूँ,

दुश्मन तो वो मेरा थाइंसाँ बुरा न था!

 

तारीफ़ क्या करूँ मैं अहबाब की मेरे,

ऐसा कोई नहीं है जिसने ठगा न था!

 

फिर से वही इरादे, फिर से वही अहद,

नए साल के अलावा कुछ भी नया न था!

 

अन्जान जब तलक था रस्म-ओ-रिवाज से,

अच्छा तो मैं नहीं थाइतना बुरा न था!

 

उड़ने की जिसमे ज़िद थीआख़िर वो उड़ गया,

उड़ने से जो डरा थावो ही उड़ा न था!

 

जीना है चैन से तो ‘अल्फ़ाज़’ चुप रहो,

सच बोलना तो पहले इतना मना न था!

||| अल्फ़ाज़ |||


किरदार = Character, चरित्र

इंसाँ = Human Being, मनुष्य

अहबाब = Friends, मित्र, प्रियजन

अहद = Promise, Oath, प्रण, सौगंध

रस्म-ओ-रिवाज = Customs And Traditions, परंपरा

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022

नश्तर...

आरज़ू है वही, जो मुक़द्दर नहीं,

क़ीमती वो लगा, जो मयस्सर नहीं!

 

जाने कब बढ़ गए पाँव इतने मेरे,

कोई चादर भी आती बराबर नहीं!

 

थोड़े-थोड़े हैं हैं सारे ही इंसाँ ग़लत,

राम तू है नहीं, मैं पयम्बर नहीं!

 

मस्जिदें भी दिवाली पे रौशन करो,

इन चराग़ों के मज़हब मुक़र्रर नहीं!

 

तू तो दरिया है तुझसे मेरा होगा क्या,

मुझको तर कर सका कोई सागर नहीं!

 

बस उसी एक मंज़िल की ज़िद है मुझे,

जिस तलक जा सका कोई रहबर नहीं!

 

पर कटे हैं मगर पार हो जाऊँगा,

हौसले से बड़ा तो समंदर नहीं!

 

सौ दफ़ा सोचकर एक दफ़ा बोलिए,

क्यूंकि ‘अल्फ़ाज़’ सा कोई नश्तर नहीं!

||| अल्फ़ाज़ |||


आरज़ू = इच्छा, चाहत, Wish, Desire

कीमती = मूल्यवान, Precious, Expensive

मयस्सर = हासिल, प्राप्त, Available

रहबर = मार्गदर्शक, Guide

पयम्बर = ख़ुदा/ईश्वर का संदेशवाहक, Messenger Of God, Prophet.

चराग़ = दीपक, An Oil Lamp

मुक़र्रर = निश्चित, नियत,Imposed, Fixed,

नश्तर = छुरी, चाक़ू, cutter, lancet

बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

तस्बिरा!!!

ग़लतियाँ फ़ितरतन देखते रह गए,
चाँद में भी गहन देखते रह गए!

 

हुस्न-ए-सीरत नहीं देख पाए मगर,
रंग-ओ-क़द-ओ-वज़न देखते रह गए!

 

मुफ़्लिसी की गली से जो गुज़रे कभी,
ज़िन्दगी के जतन देखते रह गए!

 

एक सौदाई को जब ख़ुदा मिल गया,
शैख़-ओ-बरहमन देखते रह गए!

 

सारे शोले जहाँ के इकट्ठे हुए,
मेरे दिल की जलन देखते रह गए!

 

तस्बिरा हमने फूलों पे कुछ यूँ किया,
कांटे मेरी चुभन देखते रह गए!

 

रावणों के बराबर में हो के खड़े,
लोग लंका-दहन देखते रह गए!

 

इश्क़ मीरा सा करना तो मुम्किन न था,
लोग राधा-किशन देखते रह गए!

 

जैसे शम्मा को ताके पतंगा कोई,
ऐसे हो के मगन देखते रह गए!

 

महफ़िलों में मुझे जो बुलाते ने थे,
वो मेरी अंजुमन देखते रह गए!

 

जब भी परदेस में याद आया वतन,
हर जगह हमवतन देखते रह गए!

 

उनको पीछे बहुत छोड़ आये हैं हम,
पाँव की जो थकन देखते रह गए!

 

मैंने अपने हुनर पे भरोसा किया,
लोग अच्छा शगन देखते रह गए!

 

मैंने ‘अल्फ़ाज़’ लिक्खी थीं सच्चाइयाँ,
लोग बह्र-ओ-वज़न देखते रह गए!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

फ़ितरतन = Naturally, स्वभावतः

गहन = Eclipse. ग्रहण

सीरत = Nature, Character, स्वभाव, प्रकृति

तब्सिरा = Review, Criticism, आलोचना, समीक्षा

सौदाई = पागल, दीवाना, Crazy, Mad, Lovesick

शैख़ = इस्लाम धर्म का उपदेशक, A Muslim Preacher/Saint

बरहमन = ब्राह्मण, Brahmin,

शोला = FlameFireअंगारा

मुफ़्लिसी = Poverty, निर्धनता, ग़रीबी

जतन = Effort, Endeavour, प्रयत्न, प्रयास

हमवतन =  Compatriot, Fellow-Countryman, देशवासी

शगन = An Omen, An Augury, शगुन, महुर्त

बह्र= Poetic Metre, Rhythm, शायरी का मापक/मीटर! (छंद) नज़्म के उन्नीस स्थापित आहंगों या वज़नों में से हर एक जो शेर का वज़्न जानने और ठीक करने में काम आते हैं!

वज़न,(वज़्न)= Weight, Measure, Balance, शायरी/बात का भार/गहराई!, छंद/वृत्त/बह्र/काव्य पद के अक्षरों को गणों की मात्राओं से मिलाकर बराबर करना!