सीने से तो वो लगा था, दिल से लगा न था,
कुछ इस तरह मिला वो जैसे मिला न था!
किरदार को मैं उसके कैसे बुरा कहूँ,
दुश्मन तो वो मेरा था, इंसाँ बुरा न था!
तारीफ़ क्या करूँ मैं अहबाब की मेरे,
ऐसा कोई नहीं है जिसने ठगा न था!
फिर से वही इरादे,
फिर से वही अहद,
नए साल के अलावा कुछ भी नया न था!
अन्जान जब तलक था रस्म-ओ-रिवाज से,
अच्छा तो मैं नहीं था, इतना बुरा न था!
उड़ने की जिसमे ज़िद थी, आख़िर वो उड़ गया,
उड़ने से जो डरा था, वो ही उड़ा न था!
जीना है चैन से तो ‘अल्फ़ाज़’ चुप रहो,
सच बोलना तो पहले इतना मना न था!
||| अल्फ़ाज़ |||
किरदार = Character, चरित्र
इंसाँ = Human Being, मनुष्य
अहबाब = Friends, मित्र, प्रियजन
अहद = Promise, Oath,
प्रण, सौगंध
रस्म-ओ-रिवाज = Customs And
Traditions, परंपरा
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