मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

असलियत

फ़िर्क़ों में तू बंटेगा, पंथों में तू फंसेगा,

जानेगा जब असलियत, ख़ुद पे ही तू हंसेगा!

 

भगवान की लड़ाई, भगवान वाले जानें,

इंसान की लड़ाई, इंसान ही लड़ेगा!

 

तेरा करम तेरे घर आएगा लौट करके,

तूने है कुछ जलाया, तेरा भी कुछ जलेगा!

 

कहता है हर शराबी मैं पूरे होश में हूँ,

वैसे तो हर शराबी सारा ही सच कहेगा!

 

ऐ राम के पुजारी, तू राम की तरह बन,

भगवान तब मिलेगा, इंसान जब बनेगा!

 

‘अल्फ़ाज़’ रौशनी का सीधा सा है तक़ाज़ा,

पुरनूर उतना होगा, जितना भी तू जलेगा!

||| अल्फ़ाज़ |||


फ़िरक़ा (Firqa) = Religious Sect, पंथ, साम्प्रदाय

तक़ाज़ा (Taqaaza) = Demand, माँग

पुरनूर (Purnoor) ­= Illuminated, Enlighted, तेजस्वी, रौशन

 

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