खेल नहीं है मियां झूठ सर-ए-आम बोलना,
ताज़ीम इसलिए ही तो करता हूँ सियासतदानों की !
रहने दे 'फ़राज़' की एक वर्क़ गन्दा हो जायगा,
तफ़सीर लिख देगा अगर तू हुक्मरानों की !
माना की भुला दिया मुझको तेरे शहरवालों ने,
रहने दे 'फ़राज़' की एक वर्क़ गन्दा हो जायगा,
तफ़सीर लिख देगा अगर तू हुक्मरानों की !
माना की भुला दिया मुझको तेरे शहरवालों ने,
हर ईंट पहचानती है मुझे शहर के मकानों की !
बेक़द्र मैं भटका किया ज़हीनों की बस्ती में,
इस्तक़बाल मेरा हुआ महफ़िल में दीवानों की !
आज फ़िर भगवान् के नाम पर इंसान मारा गया,
आज फ़िर इंसानियत हारी है बस्ती में इंसानों की !
एक फ़क़ीर कैसे भूखा लौट गया यहाँ से,
बस्ती तो ये हुआ करती थी मुसलमानों की !
ये भी देखना है कि मैं चराग़ हूँ या सूरज,
ताक में रहता हूँ मैं अक्सर तूफ़ानों की !
एक फ़क़ीर कैसे भूखा लौट गया यहाँ से,
बस्ती तो ये हुआ करती थी मुसलमानों की !
ये भी देखना है कि मैं चराग़ हूँ या सूरज,
ताक में रहता हूँ मैं अक्सर तूफ़ानों की !
'फ़राज़' तू क़दम भी ज़रा संभल के रक्खा कर,
लोग इता'अत करते हैं क़दमों के निशानों की !
|||फराज़|||
लोग इता'अत करते हैं क़दमों के निशानों की !
|||फराज़|||
ताज़ीम= Respect
सियासतदान= Politicians.
वर्क़= page.
तफ़सीर= Explanation, commentary.
हुक्मरानों= Ruler. Politician.
वर्क़= page.
तफ़सीर= Explanation, commentary.
हुक्मरानों= Ruler. Politician.
बेक़द्र= Unappreciated.
ज़हीनों = intelligent, ingenious.
इस्तक़बाल = Reception, Welcome.
महफ़िल= Assembly, Gathering, Party.
इंसानियत = Humanity.
फ़क़ीर= Mendicant, Dervish, Beggar.
महफ़िल= Assembly, Gathering, Party.
इंसानियत = Humanity.
फ़क़ीर= Mendicant, Dervish, Beggar.
बस्ती = Village.
चराग़= An oil lamp.
ताक= Wait. Look, Glance, Aim
इता'अत= Follow, To obey, To comply,
चराग़= An oil lamp.
ताक= Wait. Look, Glance, Aim
इता'अत= Follow, To obey, To comply,