शनिवार, 30 अप्रैल 2022

ईद

 

ईद का चाँद तो है फ़लक पे मगर,

तेरा दीदार न हो तो क्या ईद है!

 

जिसने रमज़ान भर हमसे पर्दा किया,

वो नुमूदार न हो तो क्या ईद है!

 

लाख रुपयों से बटुआ भरा हो मगर,

दोस्त और यार न हो तो क्या ईद है!

 

हीरे-मोती लगे हों लिबासों में पर,

साथ परिवार न हो तो क्या ईद है!

 

जिनको कपड़े मिले हों नए न कभी,

उनका सिंगार न हो तो क्या ईद है!

 

जश्न कितना भी सारे ज़माने में हो,

दिल में त्यौहार न हो तो क्या ईद है!

 

मेरे घर में भला ईद कैसे मने,

मुल्क में प्यार न हो तो क्या ईद है!

 

एक तकलीफ़ अल्फ़ाज़ये भी तो है,

अपनी सरकार न हो तो क्या ईद है!


||| अल्फ़ाज़ |||

फ़लक = आसमान, Sky

नमूदार = प्रकट, प्रत्यक्ष,  Apparent, Visible,

लिबास = परिधान, पहनावा, Dress, Apparel

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022

हाज़िरी

 

हंसती आँखों में ग़म की नमी आ गई,

लो बिछड़ने कि आख़िर घड़ी आ गयी!

 

यूँ तो कुछ भी मेरा वो नहीं ले गया,

उसके जाने से फिर भी कमी आ गयी!

 

जब भी संभले क़दम मस्जिदों में गए,

जब भी बहके तुम्हारी गली आ गयी!

 

उसको ख़ुश देख कर मैं सबर कर गया,

मेरे आड़े मेरी ही ख़ुशी आ गयी!

 

ज़िन्दगी दूर ज़्यादा तो मुझसे न थी,

मैंने आवाज़ दी, दौड़ती आ गई!

 

इससे बेहतर कोई सिलसिला न हुआ,

प्यार बन करके जब दोस्ती आ गई!

 

चूर तूफ़ाँ का सारा गुमाँ हो गया,

नाव साहिल पे जब काग़ज़ी आ गयी!

 

लफ़्ज़ ख़ुद ही कलम से निकलने लगे,

मुझपे अल्फ़ाज़की हाज़िरी आ गई!

||| अल्फ़ाज़ |||

गुमाँ = भ्रम,  Fancy, Doubt, Suspicion

हाज़िरी = उपस्थिति,  Presence, Attendance

गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

शायरी

मेरे दिल को जो ग़म की ख़बर हो गई,

शायरी किस क़दर बा-हुनर हो गई!

 

हम तेरे इश्क़ में मुब्तला यूँ हुए,

लोग कहते हैं हमको नज़र हो गई!

 

अर्श क्या, अब लबों तक पहुँचती नहीं,

कितनी मेरी दुआ बे-असर हो गई!

 

रात कैसे कटेगी तुम्हारे बिना,

सोचते-सोचते फिर सहर हो गई!

 

रूप उसका हमें तेरे जैसा लगा,

आग पानी में जब तर-ब-तर हो गई!

 

इस ख़ुशी से कहीं मर ही जाएँ न हम,

आज उनको हमारी फ़िकर हो गई!

 

अब ज़रा में तबीयत बिगड़ जाती है,

लग रहा है हमारी उमर हो गई!

 

मेरे लहजे में तल्ख़ी ज़माने की थी,

मुझको ‘अल्फ़ाज़’ कैसे शकर हो गई!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

बा-हुनर = प्रतिभावान, Talented

अर्श =आसमान, Sky

मुब्तला = ग्रस्त, Infest

सहर = प्रातःकाल, सवेरा, Morning

तर-ब-तर = सराबोर, Dranch

लहजा = भाव, Tone

तल्ख़ी = कड़वाहट, Bitterness

शकर = मधुमेह, Diabetes

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

सामना

देखते हैं तुमको तो देखा करते हैं,

हम न जाने क्यूँ ऐसा करते हैं!

 

इश्क़ करते हैं हम बेहद तुमसे,

ये न पूछो कि कितना करते हैं!

 

हमने सोचा कि वो हमारा है,

हम तो यूँही सोचा करते हैं!

 

वो अब किसी और घर में रहता है,

आप छत पे क्यूँ टहला करते हैं!

 

इस क़मीज़ में तुम्हारी यादें हैं,

इसे सलीक़े से पहना करते हैं!

 

चलो माँ के क़दमों को चूमें,

चलो जन्नत का बोसा करते हैं!

 

देखते हैं किससे सामना होगा,

चलो आज अपना पीछा करते हैं!

 

जाने कैसे ख़ुद भूख से मर जाते हैं,

वो लोग जो अनाज पैदा करते हैं!

 

वो जो अल्फ़ाज़करे तो बुराई है,

आप करते हैं तो अच्छा करते हैं!

||| अल्फ़ाज़ |||

बेहद = असीमित, Unlimited, Limitless

क़मीज़ = Shirt

सलीक़ा = ढंग, तमीज़, Manner   

बोसा = चुम्बन, Kiss

मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

ज़िम्मेदारी

 पूरी जैसे कोई ज़िम्मेदारी करी,

उसने कुछ इस तरह सोग़वारी करी!

 

आते ही वो घड़ी देखने लग गए,

उसने कुछ इस तरहा ग़मग़ुसारी करी!

 

तेरी आँखों में लिखा नज़र आ गया,

तूने होंठों से जो राज़दारी करी!

 

बारहा दिल ठहर कर के सुनने लगा,

बात जब भी किसीने तुम्हारी करी!

 

मेरा ईमान कुछ सोच में पड़ गया,

उसने रिश्वत ज़रा सी जो भारी करी!

 

तुम भी लोगों की बातों में आ ही गए,

तुमने क्यूँ ठीक से जानकारी करी!

 

आप तो ख़ाक हमको समझने लगे,

हमने जो आपकी ख़ाकसारी करी!

 

हमको इस काम में फ़ाइदा न हुआ,

इश्क़ ‘अल्फ़ाज़’ क्या, एक बेगारी करी!

||| अल्फ़ाज़|||

 

सोग़वारी  = शोक जाताना, Mourning

ग़मग़ुसारी  = हमदर्दी,,Consolidation

राज़दारी  = रहस्य छुपाना, Secrecy

बारहा  = अक्सर, बार-बार, Many Times, Often

ख़ाक = धूल, Dust, Ashes, Worthless, No Use

ख़ाकसारी  = विनम्रता, विनति, Humility, Humbleness

फ़ाइदा = लाभ, Profit

बेगारी = अवैतनिक कार्य, Forced Labour