ये बरसती बारिशें सबको अच्छी नहीं लगती ऐ दोस्त..
काम के लिए तरसते देखा है मैंने बरसात में मज़दूरों को...
||| फ़राज़ |||
काम के लिए तरसते देखा है मैंने बरसात में मज़दूरों को...
||| फ़राज़ |||
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें