जिंदगी दो तरह के सवालों में है
एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है!
चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
गुरुवार, 6 जुलाई 2017
मज़दूर!!!
ये बरसती बारिशें सबको अच्छी नहीं लगती ऐ दोस्त.. काम के लिए तरसते देखा है मैंने बरसात में मज़दूरों को... ||| फ़राज़ |||
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