कुछ तो करम ख़ुदा ने तुझपे ‘फ़राज़’ रखा हैं,
इस दौर में भी तुझे अज़ीज़ों से नवाज़ रखा है !
||| फ़राज़ |||
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l