गुरुवार, 10 नवंबर 2022

एहसास

सीने से तो वो लगा थादिल से लगा न था,

कुछ इस तरह मिला वो जैसे मिला न था!

 

किरदार को मैं उसके कैसे बुरा कहूँ,

दुश्मन तो वो मेरा थाइंसाँ बुरा न था!

 

तारीफ़ क्या करूँ मैं अहबाब की मेरे,

ऐसा कोई नहीं है जिसने ठगा न था!

 

फिर से वही इरादे, फिर से वही अहद,

नए साल के अलावा कुछ भी नया न था!

 

अन्जान जब तलक था रस्म-ओ-रिवाज से,

अच्छा तो मैं नहीं थाइतना बुरा न था!

 

उड़ने की जिसमे ज़िद थीआख़िर वो उड़ गया,

उड़ने से जो डरा थावो ही उड़ा न था!

 

जीना है चैन से तो ‘अल्फ़ाज़’ चुप रहो,

सच बोलना तो पहले इतना मना न था!

||| अल्फ़ाज़ |||


किरदार = Character, चरित्र

इंसाँ = Human Being, मनुष्य

अहबाब = Friends, मित्र, प्रियजन

अहद = Promise, Oath, प्रण, सौगंध

रस्म-ओ-रिवाज = Customs And Traditions, परंपरा