शनिवार, 27 अगस्त 2022

अक्स...

अक्स मेरा नहीं ये कोई ग़ैर है,
इसलिए आईने से हमें बैर है!

ज़िन्दगी के मुताल्लिक़ न कुछ पूछिए,
ठीक कुछ भी नहीं, और सब ख़ैर है!

वक़्त तो वक़्त है, फिर बदल जाएगा,
तू नज़ाकत समझ, वक़्त का फेर है!

बीच में पिस गई सारी इंसानियत,
एक तरफ है हरम, एक तरफ दैर है!

सिक्के के दोनों पहलू समझ आ गए,
आज जाकर मुकम्मल हुआ शेर है!

बोझ इतना भी ले कर के मत घूमिये,
ये जो दुनिया है ‘अल्फ़ाज़’ एक सैर है!
।।। अल्फ़ाज़।।।

अक्स = प्रतिबिंब, Reflection 
ग़ैर = अजनबी, दूसरा, Other, Stranger
बैर = विरोध, शत्रुता, Animity
मुताल्लिक़ = सम्बन्ध में, विषय में, Belonging, Relating (to)
ख़ैर = कुशल, मंगल, Well, Good
नज़ाकत = कोमलता, Delicacy
हरम = मस्जिद, Mosque 
दैर = मंदिर, Temple
मुकम्मल = पूर्ण, पूरा, Complete.




शुक्रवार, 5 अगस्त 2022

इंसान


मुश्किल में न पड़ें हम,आसान ही रहें,

क्यूँ न कि आप और हम इंसान ही रहें!

 

संजीदगी से जीने को उम्र है पड़ी,

बच्चे हैं तो ज़रा से शैतान ही रहें!

 

आई हैं पेश ऐसी कड़वी हक़ीक़तें,

इम्कान या ख़ुदारा इम्कान ही रहें!

 

अल्लाह तू भले ही नादान हमको रख,

आधे-अधूरे सच से अन्जान ही रहें!

 

‘अल्फ़ाज़’ है ज़रूरी थोड़ा अधूरापन,

अरमान कुछ हमेशा अरमान ही रहें!

।।। अल्फ़ाज़ ।।।

 

संजीदगी = Seriousness, गंभीरता 

शैतान = Naughty, शरारती

पेश = Happen, समक्ष

हक़ीक़त = Reality, वास्तविकता

इम्कान = Possibility, Probability, अंदेशा, शंका

या ख़ुदारा = O God

नादान = Innocent, Ignorant, अज्ञानी

अरमान = Desire, Longing, इच्छा, लालसा