शुक्रवार, 4 अगस्त 2023

जग-हँसाई

हमारा नाम लेकर जग-हँसाई कर रहे होंगे,
हमारे दोस्त जब हाजत-रवाई कर रहे होंगे!

हमारे दोस्त भी आख़िर हमारी ही उमर के हैं,
हमारे दोस्त भी कोई दवाई कर रहे होंगे!

किसे मालूम था एक दिन ज़माना वो भी आएगा,
कि कारोबार सब्ज़ी का कसाई कर रहे होंगे!

मेरी तस्वीर का उन्होंने जाने क्या किया होगा,
वो जब दिल की दराज़ों की सफ़ाई कर रहे होंगे!

ग़ज़ल ‘अल्फ़ाज़’ की यूँही नुमायाँ हो रही होगी,
हम अपने ही उधेड़े की सिलाई कर रहे होंगे!

||| अल्फ़ाज़ |||

जगहँसाई = उपहास, बदनामी, Dishonor, Disgrace

हाजत-रवाई = इच्छा और कामना पूरी करना

दराज़ = Drawer,

नुमायाँ = व्यक्त, प्रकट, Apparent, Visible