शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022

नश्तर...

आरज़ू है वही, जो मुक़द्दर नहीं,

क़ीमती वो लगा, जो मयस्सर नहीं!

 

जाने कब बढ़ गए पाँव इतने मेरे,

कोई चादर भी आती बराबर नहीं!

 

थोड़े-थोड़े हैं हैं सारे ही इंसाँ ग़लत,

राम तू है नहीं, मैं पयम्बर नहीं!

 

मस्जिदें भी दिवाली पे रौशन करो,

इन चराग़ों के मज़हब मुक़र्रर नहीं!

 

तू तो दरिया है तुझसे मेरा होगा क्या,

मुझको तर कर सका कोई सागर नहीं!

 

बस उसी एक मंज़िल की ज़िद है मुझे,

जिस तलक जा सका कोई रहबर नहीं!

 

पर कटे हैं मगर पार हो जाऊँगा,

हौसले से बड़ा तो समंदर नहीं!

 

सौ दफ़ा सोचकर एक दफ़ा बोलिए,

क्यूंकि ‘अल्फ़ाज़’ सा कोई नश्तर नहीं!

||| अल्फ़ाज़ |||


आरज़ू = इच्छा, चाहत, Wish, Desire

कीमती = मूल्यवान, Precious, Expensive

मयस्सर = हासिल, प्राप्त, Available

रहबर = मार्गदर्शक, Guide

पयम्बर = ख़ुदा/ईश्वर का संदेशवाहक, Messenger Of God, Prophet.

चराग़ = दीपक, An Oil Lamp

मुक़र्रर = निश्चित, नियत,Imposed, Fixed,

नश्तर = छुरी, चाक़ू, cutter, lancet

बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

तस्बिरा!!!

ग़लतियाँ फ़ितरतन देखते रह गए,
चाँद में भी गहन देखते रह गए!

 

हुस्न-ए-सीरत नहीं देख पाए मगर,
रंग-ओ-क़द-ओ-वज़न देखते रह गए!

 

मुफ़्लिसी की गली से जो गुज़रे कभी,
ज़िन्दगी के जतन देखते रह गए!

 

एक सौदाई को जब ख़ुदा मिल गया,
शैख़-ओ-बरहमन देखते रह गए!

 

सारे शोले जहाँ के इकट्ठे हुए,
मेरे दिल की जलन देखते रह गए!

 

तस्बिरा हमने फूलों पे कुछ यूँ किया,
कांटे मेरी चुभन देखते रह गए!

 

रावणों के बराबर में हो के खड़े,
लोग लंका-दहन देखते रह गए!

 

इश्क़ मीरा सा करना तो मुम्किन न था,
लोग राधा-किशन देखते रह गए!

 

जैसे शम्मा को ताके पतंगा कोई,
ऐसे हो के मगन देखते रह गए!

 

महफ़िलों में मुझे जो बुलाते ने थे,
वो मेरी अंजुमन देखते रह गए!

 

जब भी परदेस में याद आया वतन,
हर जगह हमवतन देखते रह गए!

 

उनको पीछे बहुत छोड़ आये हैं हम,
पाँव की जो थकन देखते रह गए!

 

मैंने अपने हुनर पे भरोसा किया,
लोग अच्छा शगन देखते रह गए!

 

मैंने ‘अल्फ़ाज़’ लिक्खी थीं सच्चाइयाँ,
लोग बह्र-ओ-वज़न देखते रह गए!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

फ़ितरतन = Naturally, स्वभावतः

गहन = Eclipse. ग्रहण

सीरत = Nature, Character, स्वभाव, प्रकृति

तब्सिरा = Review, Criticism, आलोचना, समीक्षा

सौदाई = पागल, दीवाना, Crazy, Mad, Lovesick

शैख़ = इस्लाम धर्म का उपदेशक, A Muslim Preacher/Saint

बरहमन = ब्राह्मण, Brahmin,

शोला = FlameFireअंगारा

मुफ़्लिसी = Poverty, निर्धनता, ग़रीबी

जतन = Effort, Endeavour, प्रयत्न, प्रयास

हमवतन =  Compatriot, Fellow-Countryman, देशवासी

शगन = An Omen, An Augury, शगुन, महुर्त

बह्र= Poetic Metre, Rhythm, शायरी का मापक/मीटर! (छंद) नज़्म के उन्नीस स्थापित आहंगों या वज़नों में से हर एक जो शेर का वज़्न जानने और ठीक करने में काम आते हैं!

वज़न,(वज़्न)= Weight, Measure, Balance, शायरी/बात का भार/गहराई!, छंद/वृत्त/बह्र/काव्य पद के अक्षरों को गणों की मात्राओं से मिलाकर बराबर करना!