अंजुमन में हमारी वो मेहमान हैं,
आज हमको क़यामत का इम्कान है!
सबने अपनी मोहब्बत की बातें करीं,
और मेरा कहीं और पर ध्यान है!
आग फिर से वही दिल में मेरे लगे,
एक बुझता हुआ दिल में अरमान है!
क्यूँ न इंसान बनकर ही हम तुम मिलें,
दिल से बेहतर गवाही भला कौन है,
दिल से बेहतर भला कौन मीज़ान है!
दोस्तों की तरह भूल जाते नहीं,
दुश्मनों का बड़ा हमपे अहसान है!
वक़्त पड़ने से पहले वहम था हमें,
इस शहर में हमारी भी पहचान है!
नज़्म ‘अल्फ़ाज़’ की आज के दौर में,
बंद घर में खुला एक दालान है!
||| अल्फ़ाज़ |||
अंजुमन = सभा, Meeting, Assembly
अरमान = लालसा, इच्छा, Longing, Desire
इम्कान = संभावना, Possiblity, Probability
मीज़ान = तुला, तराज़ू, Weigher, Balence
दालान = बैठक, ओसारा, Open Hall, Vestibule