मंगलवार, 28 जून 2022

अंजुमन


अंजुमन में हमारी वो मेहमान हैं,

आज हमको क़यामत का इम्कान है!

 

सबने अपनी मोहब्बत की बातें करीं,

और मेरा कहीं और पर ध्यान है!

 

आग फिर से वही दिल में मेरे लगे,

एक बुझता हुआ दिल में अरमान है!

 

क्यूँ न इंसान बनकर ही हम तुम मिलें,

न मैं अल्लाह हूँ, न तू भगवान है!

दिल से बेहतर गवाही भला कौन है,

दिल से बेहतर भला कौन मीज़ान है!

 

दोस्तों की तरह भूल जाते नहीं,

दुश्मनों का बड़ा हमपे अहसान है!

 

वक़्त पड़ने से पहले वहम था हमें,

इस शहर में हमारी भी पहचान है!

 

नज़्म ‘अल्फ़ाज़’ की आज के दौर में,

बंद घर में खुला एक दालान है!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

अंजुमन = सभा, Meeting, Assembly

अरमान = लालसा, इच्छा, Longing, Desire

इम्कान संभावना, Possiblity, Probability

मीज़ान = तुला, तराज़ू, Weigher, Balence

दालान =  बैठक, ओसारा, Open Hall, Vestibule

शनिवार, 4 जून 2022

क़ाइदा

 

आज़मा करके ख़ुद को ज़रा देखिए,

इंतिहा की कोई इंतिहा देखिए!

 

ख़ुद को पहचान शायद नहीं पाएँगे,

ख़ुद को बनके कोई दूसरा देखिए!

 

मेरे दुश्मन भी सुनकर के हैरान हैं,

मुझपे अपनों का वो तब्सिरा देखिए!

 

आज मक़तूल को ही सुना दी सज़ा,

मेरे हाकिम का ये फ़ैसला देखिए!

 

फ़ाइदा जिससे हो, बस उसी से मिलो,

इस शहर का नया क़ाइदा देखिए!

 

ज़िन्दगी की हक़ीक़त समझ जाएँगे,

आप पानी का एक बुलबुला देखिए!

 

ये ग़ज़ल नहीं बचपना है मेरा,

मेरी धुन में मुझे खेलता देखिए!

 

सबको अपनी तरह न समझ लीजिए,

थोड़ा ‘अल्फ़ाज़’ अच्छा-बुरा देखिए!

||| अल्फ़ाज़ |||


इंतिहा = हद, सीमा, Limit

तब्सिरा = टिपण्णी, Comment, Review

मक़तूल = मृतक, Dead

फ़ाइदा = लाभ, Profit

क़ाइदा = ढंग, रीति, Manner