रविवार, 20 फ़रवरी 2022

फ़रायज़

 फ़रायज़ याद आए हैं, रिवायत याद आई है,

अभी तारीख़ देखी तो मोहब्बत याद आई है!

 

ज़रा सी बात पर आँसू नहीं अब खर्च करते हैं,

लुटा करके ख़जाने को क़िफ़ायत याद आई है!

 

जो आईने को देखूँ तो उमर पे ध्यान जाता है,

मेरी भूली शकल मुझको निहायत याद आई है!

 

अधूरे, थे, अधूरे हैं, बहुत से शौक़ मेरे हैं,

मगर दीवार देखी तो मरम्मत याद आई है!

 

बुरा लगता था मुझको गर कोई रोके, कोई टोके,

नहीं कहता कोई कुछ तो नसीहत याद आई है!

 

सुना है अब से बस्ती में बुरा कुछ भी नहीं होगा,

सुना है कुछ शरीफ़ों को शराफ़त याद आई है!

 

किया था क़त्ल तो हमको अदालत पे यक़ीं न था,

हुए हैं क़त्ल तो हमको अदालत याद आई है!

 

दलीलें, दाँव, तरकीबें कहाँ तक काम आती हैं,

न कुछ भी काम आया तो इबादत याद आई है!

 

करें तो क्या करें ‘अल्फ़ाज़’ हम हैं फ़ितरतन क़ैदी,

हुए आज़ाद तो फिर से हिरासत याद आई है!

||| अल्फ़ाज़ |||

 

फ़रायज़ = Duties, कर्तव्य

रिवायत =Tradition, Custom, परम्परा

तारीख़ = Date, तिथि

क़िफ़ायत = Economy, मितव्ययता

उमर (उम्र) = Age, आयु

शकल (शक्ल) = Face, मुख, चेहरा

निहायत (Nihayat) = Very Much, Extreme, अत्यंत

मरम्मत (Marammat) = Maintanance

गर (Gar) = If. यदि

नसीहत (Nasiihat) =  Advice, Counsel, सदुपदेश, अच्छी सलाह

शरीफ़ (Shareef) = Gentle, सज्जन

शराफ़त (Sharaafat) = Gentleness, सज्जनता

क़त्ल (Qatl) = Murder, हत्या

यक़ीं (Yaqiin) = Confidence, Trust, विश्वास

दलील (Daleel) = Argument, तर्क

दाँव (Daanv) = Gamble

तरकीब (Tarkeeb) = Method, Trick, युक्ति

इबादत (Ibadat) = Prayer, Adoration, आराधना, भक्ति

फ़ितरतन (Fitratan) = By Nature, स्वाभाविक रूप से

क़ैदी (Qaidi) = Prisoner

हिरासत (Hirasat) = Custody, अभिरक्षा